देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने सवाल उठाया है कि चीन ने अपनी सस्ती मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर दुनिया के तमाम देशों में औसत नौकरियों के मौके खत्म कर दिए है, लेकिन उसके खिलाफ कहीं शोर नहीं होता। जबकि भारत ने आउटसोर्सिंग के काम से नौकरियों के सीमित अवसर ही खत्म किए हैं, लेकिन भारत के खिलाफ खूब हल्ला मचाया जा रहा है। नारायण मूर्ति मंगलवारऔरऔर भी

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (बीएसई कोड – 532374, एनएसई कोड – STRTECH) में इधर एक तरह की चाल बनती हुई नजर आ रही है। हालांकि पिछले ही महीने 3 अगस्त को उसने 124.20 रुपए पर 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर हासिल किया है। इस समय गिरकर 99.95 रुपए पर आ गया है। लेकिन बाजार के जानकारों के मुताबिक इसमें फिर हलचल बढ़ने जा रही है और यह 130 रुपए तक जा सकता है। यह अनिल अग्रवाल से जुड़ी वेदांताऔरऔर भी

हमें यकीन नहीं था कि बाजार खुद को ऊपरी स्तर पर टिकाए रख पाएगा, फिर भी हमने शॉर्ट सौदे काटने को क्यों कहा? यह एक बड़ा सवाल है और आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? तो जवाब है कि बारिश ने भारत की विकासगाथा को धुंधला कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों की भयंकर खामियों व घपलों ने विदेश में भारत और भारतीय राजनीति की छवि को दागदार बना दिया है। अभी देश के जीडीपी कीऔरऔर भी

कावेरी सीड कंपनी लिमिटेड (बीएसई कोड – 532899, एनएसई कोड – KSCL) आंध्र प्रदेश की कंपनी है। उसका बीज तो 1978 में पड़ गया था। लेकिन पब्लिक लिमिटेड कंपनी वह चार साल पहले 2006 में ही बनी। उसे हाल ही में फोर्ब्स पत्रिका ने एक अरब डॉलर से कम कारोबार की श्रेणी में एशिया की सर्वश्रेष्ठ 200 कंपनियों की सूची में शामिल किया है। वैसे, इस सूची में भारत की 25 कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के ग्राहकऔरऔर भी

ऑलकार्गो ग्लोबल लॉजिस्टिक्स (बीएसई कोड-532749) का शेयर बहुत सस्ता तो नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसकी बुक वैल्यू 70.74 रुपए है जबकि शेयर का भाव इस समय बीएसई में 170 रुपए तो एनएसई में 170.45 रुपए चल रहा है। यानी बुक वैल्यू से करीब 2.40 गुना। लेकिन पी/ई अनुपात के लिहाज से देखें तो यह अपनी समकक्ष कंपनियों – ब्लू डार्ट और गति से अपेक्षाकृत सस्ता है। इसका पी/ई अनुपात 21.23 है तो ब्लू डार्ट का 30.41औरऔर भी

नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) बढ़ रही है, लेकिन उसका शेयर ठहरा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इस साल जून की पहली तिमाही में 342.10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है जो साल भर पहले की इसी अवधि के शुद्ध लाभ 287.64 करोड़ रुपए से 18.93 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में उसका शुद्ध लाभ 52 फीसदी बढ़ा था। उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) अब 51.49 फीसदी हो गयाऔरऔर भी

बाजार में गिरावट आई तो इसकी मुख्य वजह यह है कि डेरिवेटिव सौदों के रोलओवर ज्यादा नहीं हो रहे हैं। कारोबारियों को चिंता है कि निफ्टी 5450 के स्तर को कायम नहीं रख पा रहा है। लेकिन यह तात्कालिक असर है। हम बाजार में इस तरह की पस्ती व घबराहट एक दिन और देख सकते हैं। गिरावट से ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप और ज्यादा करेक्शन/गिरावट के अंदेशे में शॉर्ट सौदे करऔरऔर भी

किसी शेयर की बुक वैल्यू 17.97 रुपए हो और बाजार में उसका भाव पिछले कई महीनों से 12-14 रुपए चल रहा हो तो समझ में नहीं आता। लेकिन नाकोडा लिमिटेड का हाल ऐसा ही है। ऐसा नहीं कि इसके बारे में किसी को जानकारी न हो और यह कोई गुमनाम कंपनी हो। मीडिया से लेकर इंटरनेट के अलग-अलग फोरम पर इसके बारे में बराबर लिखा जा रहा है। कइयों ने इसे मल्टी बैगर (कई गुना रिटर्न देनेवाला)औरऔर भी

अमेरिकी बाजार के खिलाड़ियों ने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि उनके यहां जमकर बिकवाली हो चुकी है और फिलहाल दूर-दूर तक गिरावट के आसार नहीं हैं। कंपनियों के तिमाही नतीजों का ताजा दौर भी बाजार को अच्छा सहयोग देगा। भारतीय बाजार भी खुद को लंबे समय से निफ्टी के 5200 और 5340 अंकों के बीच जमा चुका है। आज भी यह 5340 अंक तक चला गया और बंद हुआ 5300 अंक के एकदम करीब। 5370 अंक परऔरऔर भी