बीते हफ्ते बाजार, बीएसई सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूट गया। हालांकि हमारा मानना है कि ऐसा होना लाजिमी नहीं था। यह कुछ फंडों द्वारा घबराहट में निकलने के लिए की गई बिकवाली का नतीजा था। वैसे भी इन फंडों मे हफ्ते भर पहले ही घोषत कर दिया था कि उन्हें अपनी कुछ स्कीमों को समेटना है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने वही किया, जिसकी उम्मीद थी। लेकिन उसके इस संकेत ने अमेरिकी बाजारों परऔरऔर भी

यूरोपीय संकट का मजबूत और विश्वसनीय समाधान सबके हित में है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के जरिए समूचा वैश्विक समुदाय इस दिशा में प्रयास कर रहा है। यह बात अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेथनर ने कही। गेथनर ने व्हाइट हाउस में कहा कि मुझे लगता है कि यूरोप फिलहाल जैसे वित्तीय दबाव में है उसके मजबूत और विश्वसनीय समाधान में हम सबका हित है। यह सिर्फ अमेरिका की बात नहीं है न ही सिर्फ यूरोपियों की।औरऔर भी

अमेरिकी बाजार कल गिरे तो सही, लेकिन आखिरी 90 मिनट की ट्रेडिंग में फिर सुधर गए। अमेरिकी बाजार में ट्रेड करनेवाले कुछ फंडों का कहना है कि इस गिरावट की वजह यूरो संकट थी, न कि यह शिकायत कि 447 अरब डॉलर का पैकेज रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए काफी नहीं है। यह पैकेज तो अभी तक महज घोषणा है और इसका असर वास्तविक खर्च के बाद ही महसूस किया जा सकता है। इसऔरऔर भी

नौकरियां बढ़ाने के लिए ओबामा का 447 अरब डॉलर का पैकेज दुनिया के बाजारों में चहक नहीं ला सका क्योंकि समयसिद्ध नियम है कि जब भी कोई अच्छी खबर आती है, निवेशक हमेशा बेचते हैं। यह भी कि यह पैकेज रातोंरात असर नहीं दिखा सकता। लेकिन इसने इतना तो साबित कर दिया कि व्हाइट हाउस मानता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। इन हालात में दोतरफा बिकवाली होनी ही थी। जिन्होंने सुधार की उम्मीदऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार पर लगता है कि धमाकों का कोई असर ही नहीं होता। दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सुबह करीब 10.15 बजे बम फटा। लेकिन निफ्टी 11 बजे के बाद निर्णायक रूप से 5100 के पार चला गया। बाजार में भारी मात्रा में शॉर्ट सौदे हुए पड़े हैं। गिरावट की आशंका और आनेवाली कुछ नकारात्मक घटनाएं शॉर्ट सेलिंग करनेवालों को अपनी पोजिशन काटने से रोक रही हैं। हालांकि रिटेल निवेशक इससे बेअसर हैं क्योंकि डेरिवेटिव सेगमेंट मेंऔरऔर भी

बाजार ने कल साबित करने की कोशिश की कि अमेरिकी बाजार से हमारा कोई वास्ता नहीं रह गया है, जबकि ग्लोबल होती जा रही दुनिया का सच यह नहीं है। दरअसल बाजार के महारथियों ने कुछ एफआईआई की मदद से चुनिंदा स्टॉक्स को खरीदकर बनावटी माहौल बनाने की कोशिश की थी। खैर, कल जो हुआ, सो हुआ। आज दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद बाजार ने बढ़त पकड़ ली तो कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 0.89% बढ़करऔरऔर भी

बाजार उम्मीद के मुताबिक कमजोरी के साथ 5000 के नीचे खुला। लेकिन अंत तक सुधरकर 5017.20 पर बंद हुआ, शुक्रवार से 0.45 फीसदी गिरावट के साथ। अमेरिकी बाजार आज बंद हैं। इसलिए कल भारतीय बाजार के उस्तादों के लिए ‘खुला खेल फरुखाबादी वाला दिन’ है और वे निश्चित रूप से इस आजादी का भरपूर फायदा भी उठाएंगे। वैसे, मुझे लगता है कि पूरा सितंबर महीना ही जबरदस्त उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा क्योंकि इस दौरान कई बड़ी घटनाएंऔरऔर भी

अमेरिका में पिछले तीन दिनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इससे भारतीय बाजारों में लगातार बढ़त जारी है और वो खुद को जमाने में लग गया है। उम्मीद के अनुरूप निफ्टी 5120 से 5200 की तरफ बढ़ता जा रहा है। वहां पहुंचने के बाद ही हम समीक्षा करेंगे कि आगे की दशा-दिशा और हमारी रणनीति क्या होगी। फिलहाल आज यह ऊपर में 5113.70 तक जा चुका है। सेंसेक्स भी 16,989.86 तक जाने के बाद लौटाऔरऔर भी

खबर आई है कि पिछले हफ्ते पूंजी बाजार के 13 उस्तादों ने मुंबई में जुहू के फाइव स्टार होटल में एक मीटिंग की जिसमें तय किया गया कि उन्हें आगे कैसे और क्या करना है। इस मीटिंग में कुछ एफआईआई ब्रोकरों से लेकर प्रमुख फंड मैनेजरों व ऑपरेटरों ने शिरकत की। उनके बीच जो भी खिचड़ी पकी हो, लेकिन इससे इतना तो साफ हो गया है कि वे एक कार्टेल की तरफ काम कर रहे हैं जोऔरऔर भी

दुनिया की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जापान के सरकार ऋणों की रेटिंग घटा दी है। उसने इसे एक पायदान नीचे खिसका कर Aa3 कर दिया है। अभी तक यह Aa2 थी। एजेंसी ने कहा कि 2009 की मंदी के बाद से ही जापान का ऋण बढ़ता जा रहा है और वहां राजनीतिक नेतृत्व बहुत तेजी से बदल रहा है जिससे कारगर आर्थिक रणनीति नहीं अपनाई जा पा रही है। बता दें कि जापान में पांचऔरऔर भी