देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत अब भी मॉरीशस बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में दिसंबर तक के नौ महीनों में आए 24.18 अरब डॉलर के एफडीआई में से 8.24 अरब डॉलर यानी करीब 34 फीसदी मॉरीशस से आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि मॉरीशस का पता दिखाने पर विदेशी कंपनियों को भारत से की गई कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ता। इसलिए एफडीआई के आंकड़ों से सही तस्वीरऔरऔर भी

बीमा कारोबार को निजी क्षेत्र के लिए खोले हुए दस साल से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन साधारण बीमा ही नहीं, जीवन बीमा तक में अभी तक सरकारी कंपनियों का दबदबा है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से दिसंबर तक के नौ महीनों में जहां साधारण बीमा में मिले प्रीमियम का 58.3 फीसदी सरकारी कंपनियों की झोली में गया है, वहीं जीवन बीमाऔरऔर भी

देश का निर्यात दिसम्बर महीने में 6.7 फीसदी बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़ों की घोषणा से पहले ही वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में सोमवार को मीडिया को बताया कि दिसम्बर 2011 में देश से 25 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि आयात 37.8 अरब डॉलर का हुआ।  इस तरह दिसंबर का व्यापार घाटा 12.8 अरब डॉलर रहा है। नवम्बर महीने में निर्यात मात्र 3.87 फीसदी बढ़ा था। दिसंबर के आंकड़ों को मिला दें तो चालूऔरऔर भी

देश में कैलेंडर वर्ष 2010 के दौरान में 21 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया जो पिछले वर्ष से 22% कम है। उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में एफडीआई 27 अरब डॉलर (27,044 करोड़ रुपए) रहा था। वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2010 में एफडीआई में 23% गिरावट दर्ज की गई और यह 16.03 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 20.86 अरब डॉलर था। रिजर्वऔरऔर भी