भोर से पहले आंख बंदकर सोचते रहते हैं तो हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा नज़र आता है। आंखें खोलकर देखते हैं तो इस बीच हर तरफ उजाला आ चुका होता है। लेकिन प्रकृति का यह नियम क्या समाज पर भी लागू होता है?और भीऔर भी

एक व्यक्ति विशाल संस्था से कैसे लड़ सकता है? अकेला चना भाड़ कैसे फोड़ सकता है? लेकिन अंधेरे को चीरने के लिए एक दीया ही काफी है। रावण की लंका जलाने के लिए एक हनुमान ही काफी होता है।और भीऔर भी

जहां हाथ को हाथ सुझाई नहीं देता, वैसे कुहासे व अंधेरे से घिरे भविष्य में विचार हमारे लिए जुगनू का काम करते हैं। वे खटाक से अपनी टॉर्च जलाकर हमें कम से कम कुछ दूर तक का रास्ता दिखा देते हैं।और भीऔर भी

यह वाकई बहुत बुरी बात है कि बिजनेस चैनल अब दर्शकों की भावनाओं के साथ खेलने लगे हैं। एक बिजनेस चैनल और उससे जुड़ी समाचार एजेंसी ने खबर फ्लैश कर दी कि सरकार पेट्रोलियम तेलों पर फिर से नियंत्रण कायम करने जा रही है। कितनी भयंकर बेवकूफी की बात है? सुधारों को पटलने का सवाल कहां उठता है? यह तो तभी हो सकता है जब सीपीएम केंद्र सरकार की लगाम थाम ले! स्वाभाविक रूप से पेट्रोलियम मंत्रीऔरऔर भी

खुद को अंधेरी कालकोठरी में न बंद कर लो तो अकेले कहां होते हो आप? दिन में चलते हो तो सूरज बादलों की ओट से भी निकलकर आपके साथ आ जाता है। रात में चांद सितारे दुनिया के हर कोने में आपके साथ रहते हैं।और भीऔर भी