पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक बैंक की बैलेंस शीट ₹76,25,421.93 करोड़ थी। तब उसने इसका 7.5% हिस्सा कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) में डाला था। यह रकम 5,71,906.64 करोड़ रुपए थी। बीते वित्त वर्ष 2025-26 में रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 20.6% बढ़कर ₹91,97,121.08 करोड़ हो गई। पश्चिम एशिया संकट के चलते अर्थव्यवस्था जिस तरह दबाव में है और रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है, उसमें सीआरबी को घटाने का कोई तुक नहीं था। फिर भी सरकार को ज्यादा लाभांश देने लिए इसे घटाकर 6.5% कर दिया गया। रिजर्व बैंक बोर्ड ने पांच साल मेें पहली बार सीआरबी का अनुपात घटाया है। यह 2020-21 में 5.5%, 2021-22 में 6%, 2022-23 में 6.5% और 2024-25 में 7.5% रखा गया था। अगर घटाने के बजाय 2025-26 में इसे 7.5% रखा गया होता तो सीआरबी की रकम 6,89,784.08 करोड़ होती। लेकिन सीआरबी को 6.5% रखने से यह रकम ₹5,97,812.87 करोड़ रह गई। इस तरह सीआरबी से चुराए गए ₹91,971.21 करोड़ मोदी सरकार को दिए गए ₹2,86,588.46 करोड़ लाभांश का हिस्सा बन गए। देश की शीर्ष मौद्रिक संस्था, रिजर्व बैंक के साथ यह धूर्तता न की गई होती तो मोदी सरकार को इस साल मिला लाभांश ₹1,94,617.25 करोड ही रहता, पिछले साल के ₹2,68,590.07 से कम। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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