वैश्विक असंतुलन में भारत की भूमिका नहीं: प्रणब

भारत ने जी20 देशों विशेषकर इसके धनी सदस्यों को साफ बता दिया है कि वैश्विक असंतुलन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढाव में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में धनी व प्रमुख विकासशील देशों के इस संगठन के वित्त मंत्रियों की बैठक के पहले सत्र में कहा कि भारत की स्थिति यह है कि उसने वैश्विक असंतुलन बनने या उसके बने रहने में किसी तरह का योगदान नहीं किया।

उन्होंने कहा, “न ही इसका उस उतार चढाव में किसी तरह का योगदान है जो हम जिंस बाजारों सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में देख रहे हैं।” नवीनतम अनुमानों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2010-11 में 8.6 फीसदी रहेगी और भारतीय विकास गाथा फिलहाल यूं ही तेजी से बढ़ती रहेगी। मुखर्जी ने कहा कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था मौसमी कारकों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर उसके असर से प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा, “मौसम की अनिश्चितता के कारण भारत में ऊंची व अस्थिर खाद्य उत्पाद मुद्रास्फीति देखने को मिली है।” उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि से खपत पैटर्न में बदलाव का कुछ असर भी खाद्य मुद्रास्फीति पर रहा है। मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य जिंसों की ऊंची कीमतों के चलते भारत को खाद्य मुद्रास्फीति से निपटने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिले।

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