अक्सर जिन्हें हम जानते हैं, उन्हें ही पूरी दुनिया समझ बैठते हैं। उनकी नकारात्मक प्रतिक्रिया से टूट जाते हैं। नहीं जानते कि जो लहर हमारे अंदर उठी है उसका स्रोत तो हमारे दायरे के बाहर का सागर है।
2010-12-06
अक्सर जिन्हें हम जानते हैं, उन्हें ही पूरी दुनिया समझ बैठते हैं। उनकी नकारात्मक प्रतिक्रिया से टूट जाते हैं। नहीं जानते कि जो लहर हमारे अंदर उठी है उसका स्रोत तो हमारे दायरे के बाहर का सागर है।
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