कोई अमृतकाल नहीं, लौटा वैदिक काल!
2025-05-27
देश में इस समय वर्तमान या भविष्य का अमृतकाल नहीं, बल्कि अतीत का वैदिक काल चल रहा है। वेदों में शब्द को ही प्रमाण और कह देने से हो जाने की धारणा थी। ईश्वर ने कहा कि एकोहम बहुष्याम तो एक से अनेक बनते चले गए। भाजपा व संघ की शरण में गए सारे गण व अधिकारी इसी धारणा के संवाहक हैं। नीति आयोग के सीईओ बनाए गए बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 4.19 ट्रिलियन केऔरऔर भी

