जीडीपी के साथ डिफ्लेटर की तिकड़मबाजी करने के बावजूद मोदीराज में भारत ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन व दक्षिण अफ्रीका) ही नहीं, जी-20 देशों में प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे गरीब है। मालूम हो कि जी-20 के बाकी देश जीडीपी की गणना में डबल डिफ्लेटर की पद्धति अपनाते हैं। वे आउटपुट डिफ्लेटर लगाकर रीयल आउटपुट और इनपुट डिफ्लेटर लगाकर रीयल इनपुट निकालते हैं। फिर रीयल इनपुट को रीयल आउटपुट से घटाकर रीयल जीडीपी निकालते हैं।औरऔर भी

दुनिया भर के तमाम विकसित और विकासशील देश असली जीडीपी निकालने के लिए डिफ्लेटर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन भारत इकलौता देश है जहां डिफ्लेटर का चोंगा पहनाकर भयंकर छल किया जा रहा है और सच छिपाया जा रहा है। अमेरिका समेत तमाम विकसित देश डिफ्लेटर के तौर पर प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) का उपयोग करते हैं। यही स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय मानक भी है। भारत डिफ्लेटर के रूप में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) का उपयोग करता है। दिक्कतऔरऔर भी

सरकारी दखल और खर्च अंततः भ्रष्टाचार को ही बढ़ाता है। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के खुलासे से यह बात एकदम साफ हो गई। लेकिन मोदी सरकार जीडीपी का जो आंकड़ा पेश करती है, उसमें इससे भी बड़ा लोचा है जिससे देश के 99.99% लोग अनजान हैं। जीडीपी के दो आंकड़े होते हैं। एक नॉमिनल और दूसरा रीयल। नॉमिनल की गणना मौजूदा मूल्यों पर की जाती है जो ऊपर-ऊपर दिखता है जिसमें झाग ही झाग होते हैं। रीयल कीऔरऔर भी

हमारा जो जीडीपी या अर्थव्यवस्था मार्च 2024 में खत्म वित्त वर्ष 2023-24 में 8.2% की शानदार गति से बढ़ी थी, उसकी विकास दर ठीक तीन महीने बाद जून 2024 में खत्म तिमाही में घटकर 6.7% पर आ गई! यह क्यों हुआ, क्यों यह हुआ? हालांकि सरकारी अर्थशास्त्री इस विकास दर को भी ‘रोबस्ट’ बता रहे हैं। कभी सरकार के आलोचक रहे भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने अपने 800-1000 शब्दों के ताज़ाऔरऔर भी

मोदी सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही सब कुछ हैं। उनके मंत्रियों-संत्रियों के लिए तो ‘भज गोविंदम’ यही है कि मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। लेकिन मोदी का जादू धीरे-धीरे टूट रहा है। फिर भी तिलिस्म के दो सूत्र अभी तक धमाल मचाए हुए हैं। एक यह कि दुनिया भर में मोदी का डंका बज रहा है और उन्होंने भारत का बड़ा नाम किया है। गांवों से लेकर शहरों व महानगरों तक तमाम बड़े-बूढ़े इसीऔरऔर भी