विकास हो या रिटर्न, समझें असली दर!
आर्थिक विकास को समझना और निवेश करना है तो हमें नॉमिनल और रीयल या मौजूदा मूल्यों पर दिख रहे ऊपर-ऊपर के आंकड़े और स्थिर मूल्यों पर निकाले गए असली आंकड़े का अंतर साफ समझना होगा। नहीं तो कोई भी हमें चरका दे देगा। जैसे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 15 अगस्त को लालकिले से बखाना कि हम प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने में सफल हुए हैं। लेकिन नहीं बताया कि किसने साल में और सतहीऔरऔर भी
तय है देश में बढ़ेंगे अमीर, घटेंगे गरीब
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की मानें तो भारत में सालाना ₹30 लाख से ज्यादा कमानेवाले अमीर परिवारों की संख्या वित्त वर्ष 2020-21 के 1.07 करोड़ से 2030-31 तक बढ़कर 3.5 करोड़ हो सकती है। दूसरी तरफ साल में ₹1.25 लाख से भी कम कमानेवाले गरीब परिवारों की संख्या वित्त वर्ष 2020-21 के 4.52 करोड़ से घटते-घटते 2030-31 में 1.99 करोड़ और 2046-47 तक मात्र 72 लाख पर आ सकती है। तब देश के ज्यादातर गरीब परिवार ग्रामीण इलाकोंऔरऔर भी
मोहभंग! भाजपा से बिदक रहा मध्य वर्ग
भारत का मध्य वर्ग पिछले दस साल से मोदी सरकार और भाजपा का समर्थक रहा है क्योंकि उसे लगता था कि वो आर्थिक विकास को गति देकर रोज़ी-रोज़गार व समृद्धि के अवसर पैदा करेगी। लेकिन अब उसे लगने लगा है कि मोदी सरकार इसके बजाय अपने मुठ्ठी भर यारों पर देश के संसाधन लुटा रही है, जबकि मध्य वर्ग की हालत खस्ता है और उसे अपनी गाढ़ी कमाई पर लगातार ज्यादा से ज्यादा टैक्स देना पड़ रहाऔरऔर भी
मतिअंध सरकार, मध्य वर्ग नज़रअंदाज़
उपभोक्ता साजोसामान बनानेवाली विदेशी कंपनियां और फाइनेंस के खेल से जमकर कमाने की चाह में लगे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक दशकों से भारत पर फिदा हैं क्योंकि यहां का मध्य वर्ग उन्हें कई देशों से बड़ा बाज़ार नज़र आता है। भारत सरकार के पास अभी तक इसकी कोई गणना नहीं है कि देश के मध्य वर्ग का आकार कितना है। लेकिन विदेशी संस्थाओं के मुताबिक यह हमारी 144 करोड़ की आबादी का लगभग 30% यानी 43.20 करोड़ केऔरऔर भी






