छोटे देशों तक से देश को व्यापार घाटा!
मॉरगन स्टैनली रिसर्च का अनुमान है कि भारत तीन साल बाद 2027 में ही जापान व जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। साथ ही साल भर के भीतर बीएसई सेंसेक्स 82,000 अंक के पार जा सकता है। यह एक विदेशी ब्रोकरेज़ फर्म की सदिच्छा या मार्केटिंग पैंतरा है। हो सकता है कि ऐसा हो भी जाए। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अंदर से तब मजबूत होगी, जब उसकी बुनियाद सत्यनिष्ठा व ईमानदारीऔरऔर भी
निश्चिंत है बाज़ार, निरंतर रहेंगी नीतियां!
शेयर बाज़ार देश में राजनीतिक स्थिरता चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने एनडीए सरकार में जिस तरह टीडीपी और जेडी-यू की बैसाखियों पर निर्भरता के बावजूद वित्त व कॉरपोरेट मामलात, वाणिज्य व उद्योग, रेल, राजमार्ग, पोर्ट व शिपिंग, डिफेंस, शिक्षा, आईटी और सूचना प्रसारण जैसे तमाम अहम मंत्रालय अपने पास रखे हैं, उससे बाज़ार को निरतंरता का यकीन हो गया है। इसलिए देशी-विदेशी कॉरपोरेट क्षेत्र को लगता है कि मोदी सरकार अपने तीसरेऔरऔर भी
निवेश के लिए सोचें, समझें व सतर्क रहें
अपने प्रमुखतम स्टॉक एक्सचेंज एनएसई का नारा है सोच कर, समझ कर, इन्वेस्ट कर। यह अलग बात है कि वो सोच-समझकर इन्वेस्ट करने का कोई टूल उपलब्ध नहीं कराता। वो यह भी नहीं बताता कि शेयर बाज़ार में इन्वेस्ट करने के लिए सोचने-समझने के साथ ही बराबर सतर्क रहने की भी ज़रूरत है। दुनिया हर पल बदलती रहती है, भले ही हमें दिखे या न दिखे। लेकिन शेयर बाज़ार तो हर पल बदलता ही नहीं, दिखता भीऔरऔर भी
रोज़गार बढ़े कैसे, अटकी मैन्यूफैक्चरिंग!
देश में काम का और काम भर का रोज़गार तब तक नहीं पैदा होगा, जब तक मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र जमकर नहीं बढ़ता। जीडीपी बढ़ रहा है। लेकिन उसमें मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान नहीं बढ़ रहा। मनमोहन सरकार ने 2012 में इसे 2022 तक 25% और मोदी सरकार ने 2014 में इसे 2025 तक 25% पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन यह 2012 में 16% था और अब भी 16% के आसपास अटका है। दरअसल जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंगऔरऔर भी






