बर्तन में पानी रख उस पर सोडियम को टुकड़ा डाल दें तो वह इस कोने से उस कोने तक छनाक-छनाक भागता रहता है। अंत में खत्म हो जाता है। शेयर बाज़ार के बहुत सारे ट्रेडर भी हमेशा इसी तरह बेचैन रहते हैं। इधर से उधर छनाक-छनाक करते रहते हैं। हमेशा तलाश में रहते हैं कि कहीं से कोई टिप्स मिल जाएं। अंत में ऐसे ट्रेडर भी खत्म हो जाते हैं। जो शांत है, वही शेयर बाज़ार मेंऔरऔर भी

हर स्टॉक के पीछे कोई न कोई कंपनी होती है। उसके भाव लम्बे समय में और कभी-कभी छोटी अवधि में भी कंपनी की खबरों और उसके फंडामेंटल्स से प्रभावित होते हैं। लेकिन हर स्टॉक का अपना अलग स्वभाव होता है। उसका यह स्वभाव उसमें सक्रिय ट्रेडरों व निवेशकों की मानसिकता से तय होता है। किसी शेयर पर हर दिन अक्सर सुबह गरमी छाई रहती है और शाम होते-होते उतर जाती है। वहीं कुछ स्टॉक्स दो बजे केऔरऔर भी

मत भूलें कि शेयर बाज़ार किसी का धंधा है। बीएसई, एनएसई, एनएसडीएल, सीडीएसएल, ब्रोकरेज़ हाउस। यहां तक कि हमारे हर सौदे पर पूंजी बाज़ार नियामक सेबी का आधिकारिक कट और केंद्र सरकार का टैक्स होता है। हम यहां सौदा करते हैं तो इन सबका धंधा चलता है। ऐसा धंधा जिसमें नुकसान नहीं, फायदा ही फायदा है। फिजिक्स में हम पढ़ते हैं कि सौ सीढ़ी चढ़े और सौ सीढ़ी उतर गए तो कुल मिलाकर किया गया कार्य शून्यऔरऔर भी

भारत दो साल पहले ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आईएमएफ का कहना है कि चार साल बाद 2027 में वह जापान व जर्मनी को पीछे छोड़ अमेरिका व चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आगे की यात्रा यकीनन कठिन होगी। कारण, जापान व जर्मनी की अर्थव्यवस्था हमसे ज्यादा बड़ी नहीं है। लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था हमसे पांच गुनी बड़ी है। हमारा जीडीपी अभी 3.2 लाख करोड़ याऔरऔर भी

आखिर भारत का सोया हुआ मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र कब जाएगा? हमारा देश अमेरिका, जापान व चीन के बाद कब दुनिया की फैक्टरी बनने जा रहा है? जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा अपने यहां 10-12 साल से 14-16% पर अटका हुआ है। वहीं, एशिया के अन्य देशों – बांग्लादेश में यह 21.2%, वियतनाम में 24.6%, दक्षिण कोरिया में 25.5%, थाईलैंड में 27% और चीन में 27.4% पर पहुंच चुका है। पहले हमारे यहां भी लक्ष्य था कि साल 2025औरऔर भी