सेबी की अध्ययन रिपोर्ट में लिखा गया है, “इक्विटी एफ एंड ओ सेगमेंट में 89% व्यक्तिगत ट्रेडरों को वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान औसतन 1.1 लाख रुपए का नुकसान हुआ, जबकि 90% सक्रिय ट्रेडरों का औसत नुकसान इसी अवधि में 1.25 लाख रुपए का दर्ज किया गया। सक्रिय ट्रेडरों के पूरे समूह की बात करें तो उनके शुद्ध ट्रेडिंग नुकसान का औसत इस दौरान 50,000 रुपए का रहा।” बता दें कि व्यक्तिगत निवेशकों या ट्रेडरों की श्रेणीऔरऔर भी

पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट के लिए देश के दस शीर्ष ब्रोकरों से डेटा इकट्ठा किया और उनका विश्लेषण किया। ब्रोकरों का चयन इस आधार किया गया कि शेयर बाज़ार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) सेगमेंट के टर्नओवर में किनके पास व्यक्तिगत निवेशकों/ट्रेडरों का हिस्सा सबसे ज्यादा है। इस तरह चुने गए शीर्ष दस ब्रोकरों के पास वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान एफ एंड ओ सेगमेंट में व्यक्तिगत या रिटेल ट्रेडरोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट से कमाने की जुगत में लगे दस में से नौ व्यक्तिगत या रिटेल ट्रेडर घाटा उठाते हैं। यह नतीजा है पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी की एक हालिया रिपोर्ट का। इस रिपोर्ट में सेबी ने पाया है कि वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान शीर्ष के 1% ट्रेडरों ने बाज़ार से हुए कुल मुनाफे का 51% हिस्सा हासिल किया। वहीं, अगर शीर्ष के 5% ट्रेडरों को शुमार कर लें तो एफऔरऔर भी

दुनिया पर भले ही नई आर्थिक मंदी का संकट मंडरा रहा हो। लेकिन हमारा देश इंडिया यानी भारत इस वक्त भयंकर ही नहीं, भयावह विश्वास के संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री झूठ बोलते हैं। समूची सरकार और उसमें बैठी पार्टी के आला नेता झूठ बोलते हैं। सरकार का हर मंत्री झूठ बोलता है। छोटे-बड़े अफसर भी बेधड़क झूठ बोलते हैं। हालत उस कविता जैसी हो गई है कि राजा बोला रात है, रानी बोलीऔरऔर भी

पूरे पांच हफ्ते के अंतराल के बाद थोड़ा-सा स्वस्थ होते ही यह कॉलम लेकर एक बार फिर आपकी सेवा में हाज़िर हूं। कोशिश करता हूं कि हर हफ्ते निवेश लायक एक नई लिस्टेड कंपनी पेश कर दूं। लेकिन शेयर बाज़ार में तो ढाई हज़ार से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं। आप हमारी बताई हर कंपनी में निवेश करने लगें तो चकरघिन्नी बन जाएंगे। दरअसल, हमें समझना होगा कि बाज़ार में भांति-भांति के लोग निवेशकों को फंसाने के लिएऔरऔर भी