बात बड़ी साफ है कि भारतीय शेयर बाज़ार में अगर निफ्टी के 20,000 अंक तक पहुंचने के बाद भी तेज़ी का नया दौर शुरू होना है तो वैश्विक स्तर पर, खासकर अमेरिका में भी आर्थिक उभार की स्थिति रहनी चाहिए। तब तक मोमेंटम स्टॉक्स के पीछे ज्यादा समय तक भागना घाटे का सौदा बन सकता है। खुद ही देख लीजिए कि एक समय बाज़ार के चहेते रहे ज़ोमैटो, नाइका, कारट्रेड, व पेटीएम जैसे स्टॉक्स का क्या हश्रऔरऔर भी