ऑप्शंस में चकरघिन्नी बन रहा है ट्रेडर!
शेयर बाज़ार के ट्रेडर का यूं फ्यूचर्स को छोड़ ऑप्शंस की तरफ भागना काफी चिंताजनक है। कारण यह है कि ऑप्शंस को खरीदना भले ही फ्यूचर्स की तुलना में बहुत सस्ता हो, लेकिन ऑप्शंस में घाटे की खोह बहुत गहरी और उसकी गणना काफी जटिल है, जबकि फ्यूचर्स में घाटे की गणना सीधी-सरल व आसान है। निफ्टी फ्यूचर्स में एक समय तीन ही सीरीज अपलब्ध होती है। जैसे अभी जुलाई, अगस्त व सितंबर की सीरीज में सौदेऔरऔर भी
फ्यूचर्स छोड़ क्यों धावै ऑप्शंस की ओर
भाव कोई भगवान नहीं तय करता। शेयर बाज़ार में भाव वही होते हैं जो ट्रेडर देने को तैयार होते हैं। इस समय निफ्टी फ्यूचर्स का भाव स्पॉट से बहुत मामूली प्रीमियम या डिस्काउंट तक पर इसलिए चल रहा है क्योंकि फ्यूचर्स में हर दिन मार्क-टू-मार्केट का सिस्टम है और ट्रेडर मार्क-टू-मार्केट घाटा उठाने की न तो स्थिति में हैं और न ही इसके लिए तैयार हैं। वे बहुत हाथ-पैर मार रहे हैं। लेकिन इस दुर्दशा से निकलनेऔरऔर भी
मंदी की जकड़ में ट्रेडर घबराए रिस्क से
निफ्टी फ्यूचर्स का साथ इधर समस्या यह चल रही है कि निफ्टी के स्पॉट भाव से वह बेहद मामूली प्रीमियम पर रहता है और बहुत बार तो डिस्काउंट या नीचे चला जाता है। इस डिस्काउंट का सीधा-सा मतलब यह हुआ कि ट्रेडर निफ्टी के बढ़ने की गुंजाइश नहीं देख रहे तो उसके फ्यूचर्स कम भाव पर बेचने को तैयार हैं। यह बाज़ार के लिए बेहद दुखद और अफसोसनाक है। मंदी की धारणा ने उनको ऐसा जकड़ लियाऔरऔर भी
ऑप्शंस के साथ फ्यूचर्स ट्रेडर भी बेचैन!
शेयर बाज़ार के आम ट्रेडर परेशान हैं, ऑप्शंस ट्रेडर हैरान हैं तो फ्यूचर्स ट्रेडर भी कोई कम हैरान-परेशान नहीं। वे तो बेहद जटिल, अनोखी व गंभीर चुनौती झेल रहे है। ऐसी पहेली जिससे हम अक्सर रू-ब-रू नहीं होते। जब सरकारी बॉन्डों की यील्ड यानी रिस्क-फ्री ब्याज दर बढ़ रही हो, तब ऑप्शंस के साथ ही फ्यूचर्स का प्रीमियम बढ़ जाना चाहिए क्योंकि तब सौदे को कैरी करने की लागत बढ़ जाती है। प्रीमियम का सीधा रिश्ता उसऔरऔर भी
दूसरे के उद्यम से होती है हमारी कमाई!
एक बात हमें बहुत साफ समझ लेनी चाहिए कि वित्तीय बाज़ार में हम अपनी बचत लगाकर जो भी कमाते हैं वह किसी दूसरे के उद्यम का नतीजा होता है। बैंक हमें एफडी पर इसलिए ज्यादा ब्याज देता है क्योंकि वह हमारे धन को उधार पर चढ़ाकर उससे ज्यादा कमा लेता है। सरकार हमें बॉन्ड पर इसलिए ज्यादा ब्याज देती है क्योंकि हमारा धन उसकी ज़रूरतें पूरी करता है और उसके पास उधार चुकाने के लिए ज्यादा उधारऔरऔर भी






