विदेशी संस्थागत या पोर्टफोलियो निवेशक पिछले छह महीनों से लगातार भारतीय शेयर बाज़ार में बेचे जा रहे हैं। यह सिलसिला तब से शुरू हुआ है, जब से 19 अक्टूबर 2021 को निफ्टी-50 ने 18,604.65 अंक छूकर अब तक का ऐतिहासिक शिखर बनाया। उस हफ्ते से दिसंबर के अंत तक एफआईआई या एफपीआई ने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से 99,461 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। सेबी की तरफ से व्यवस्थित डेटा रखनेवाली संस्था एनएसडीएल केऔरऔर भी

मौजूदा परिस्थिति में शेयर बाज़ार के लम्बे निवेशक के सामने क्या रास्ता है? इसका पहला जवाब तो यह कि एफडी या सरकारी बॉन्डों में आधी बचत लगा देने के बाद बाकी रकम का बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में एसआईपी (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के ज़रिए लगाएं। फिर भी सीधे स्टॉक्स में लगाना है तो ऊंचे स्तर की मजबूत कंपनियों के शेयर कम भाव पर खरीदें। जो मूलतः कमज़ोर कंपनियां हों, किसी भी वजह से घाटेऔरऔर भी

सवाल उठता है कि शेयर बाज़ार में बने आज के हालात में क्या किया जाए? ट्रेडर या निवेशक का रास्ता क्या है? अगर ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो सीधा-सा जवाब है कि ट्रेडिंग में ऐसी ऊंच-नीच बराबर आती रहती है। यह  बाज़ार का मूल स्वभाव है। इसलिए ट्रेडिंग में सफलता या बाज़ार से नियमित कमाई के लिए आपको अपने माफिक अच्छा-सा ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना होगा और लगातार सच्चाई पर उसे कसते और आजमाते हुए बराबर अपग्रेडऔरऔर भी

बाज़ार को दो साल से चढ़ाए जा रहे देश के प्रोफेनशल निवेशक हों, संस्थाएं या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हो, वे इधर जमकर मुनाफावसूली कर रह हैं तो यह एकदम स्वाभाविक है। जो भी ज्यादा कमा लेता है, उसे सब गंवा देने की चिंता सताती है। वो भी तब जब तरफ अनिश्चितता के घने बादल छाते जा रहे हों। बाहर ही नहीं, अब तो देश के भीतर भी पांच राज्यों के ताज़ा विधानसभा चुनावों ने अनिश्चितता बढ़ाऔरऔर भी