शेयर बाज़ार में सुरक्षित ट्रेडिंग के लिए मूलभूत शर्ते हैं – कम से कम 50 लाख की ट्रेडिंग पूंजी, घर-परिवार के लिए नियमित गुजारे के लिए 2.50 करोड़ रुपए की एफडी जैसे माध्यम, कम से कम दो साल के घर-खर्च का अलग इंतज़ाम। इन सभी शर्तों का पूरा करने से भी ट्रेडिंग में सफलता सुनिश्चित नहीं होती। इसे सुनिश्चित कर सकता है केवल और केवल आपका गहन अभ्यास। इसके बाद का रास्ता भी कतई आसान नहीं है।औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का खेल है, प्रतिस्पर्धा है। इसमें देश ही नहीं, विदेश तक के लाखों खिलाड़ी सक्रिय हैं। सब एक से बढ़कर खेल। पूंजी से लेकर ज्ञान और हुनर के उस्ताद। ऊपर से सिस्टम की छोटी से छोटी कमज़ोरी से खेलनेवाले खिलाड़ी। बॉक्सिंग सभी कर सकते हैं। मुठ्ठी बांधकर चलाना किसे नहीं आता! लेकिन रिंग में सामनेवाले को नॉक-आउट करने से पहले हज़ारों घंटों के अभ्यास की दरकार होती है। स्टॉक ट्रेडिंग मेंऔरऔर भी

क्रिकेटर आईपीएल के एक सीजन में ही करोड़ों कमा लेते हैं। लेकिन क्या हर कोई कामयाब क्रिकेटर बन सकता है? इसी तरह वित्तीय बाज़ार का सफल ट्रेडर बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है। इसके लिए गहरी व्यावहारिक समझ के साथ-साथ गहन अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। यह सब अनायास चुटकी बजाकर नहीं होता। शेर के जबड़े से मांस का टुकड़ा निकालना आसान नहीं। शेयर बाज़ार में कभी तेज़ी का तूफान चलता है, कभी मंदी का अवसाद होता हैऔरऔर भी

जो काम-धंधा बंद होने या नौकरी छोड़ने से बेरोज़गार हो गए हैं, उनके अलावा भी लाखों बारोज़गार लोग हैं जिन्हें लगता कि वे नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अच्छा कमा सकते हैं। अभी तो कोविड का दौर चल रहा है। करीब पांच साल पहले एक ऐसे शख्स से मिला था जो आईसीआईसीआई बैंक की नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने पर आमादा था। उसका साफ कहना था कि वह निफ्टी-50 और बैंक निफ्टी केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेशकों में ब्लूचिप-ब्लूचिप की बड़ी चर्चा होती है। भाव यह होता है कि ऐसी कंपनियों के निवेश में कोई रिस्क नहीं है। एक बार ले लो। फिर ज़िंदगी भर वे आपको रिटर्न देती रहती हैं। लेकिन यह एक भयंकर भ्रम है। रिस्क ब्लूचिप कंपनियों में भी भरपूर होता है। कल की ब्लूचिप कंपनी को खाक बनते देर नहीं लगती। इसलिए ब्लूचिप के पीछे भागने से अच्छा है कि ऐसी कंपनी चुनो जिसके बिजनेस मेंऔरऔर भी