आशावाद के बाद बाज़ार में अभी अनिश्चितता का आलम है। जहां बेहतरी की कहानियां शेयर बाज़ार में लालच की भावना को हवा देती रहीं, वहीं अनिश्चितता भय को बढ़ाती जा रही है। बाज़ार से लालच की भावना भाग चुकी हैं। कभी यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के खतरे तो कभी अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका के नाम पर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसमें भारत ही नहीं, दुनियाऔरऔर भी