अर्थव्यवस्था और रोज़ी-रोज़गार की हालत खराब। फिर भी कुलांचे मार रहा है शेयर बाज़ार! इसे देखकर बहुतेरे लोग शेयर बाज़ार में धन लगाने को लपकते जा रहे हैं। लेकिन किन शेयरों में धन लगाएं, यह समझ में नहीं आता। उन्हें नहीं पता कि अब वे सीधे-सीधे समूचे शेयर बाज़ार की यूनिटें खरीद सकते हैं। बाज़ार में निफ्टी जैसे सूचकांकों पर आधार इंडेक्स फंड हैं जिनमें वे सीधे अपने डीमैट खाते से निवेश कर सकते हैं। इनमें रिटर्नऔरऔर भी

इस समय बाज़ार की दैनिक वोलैटिलिटी पहले से दोगुनी हो गई है। निफ्टी इंट्रा-डे अमूमन 200-300 अंकों का चक्कर काटता रहा है। हम इसका कारण जान लें, तब भी उसे बदल नहीं सकते। इसलिए ट्रेडरों, खासकर इंट्रा-डे ट्रेडरों के लिए बेहतर होगा कि वो इससे मुनाफा कमाने की जुगत खोज निकाले। होश रहे कि निफ्टी हवा में लटका सूचकांक नहीं है। वो 50 स्टॉक्स का सम्मिलित व्यक्तित्व है। वो अगर दिन में 200-300 अंक उठता-गिरता है तोऔरऔर भी

इंडिया वीआईएक्स से निफ्टी के दैनिक दायरे की गणना कैसे करते हैं? मसलन, इस साल 13 दिन की छुट्टी घटाकर 249 दिन ट्रेडिंग होनी है। 249 का वर्गमूल 15.78 हुआ। इंडिया वीआईएक्स कल 21.96 रहा है। इसे 15.78 से भाग दें तो उत्तर 1.39 निकला। इससे ट्रेडर निष्कर्ष निकालते हैं कि मौजूदा दौर में एक दिन से दूसरे दिन के बीच निफ्टी 1.39% तक ऊपर-नीचे जा सकता है। दिक्कत यह है कि इस गणना में इसका कोईऔरऔर भी

इंडिया वीआईएक्स का निचला स्तर 10 का है, जबकि ऊपरी स्तर 80-90 तक जा सकता है। पिछले साल 24 मार्च को यह 86.35 तक ऊपर चला गया था, जबकि 17 दिसंबर को यह 14.05 पर 52 हफ्तों के न्यूनतम स्तर पर था। फिलहाल गिरते-गिरते 20-30 की रेंज में चल रहा है। सिद्धांततः माना जाता है कि यह सूचकांक 10-15 की रेंज में है तो बाज़ार में घबराहट बहुत कम है और 50-60 की रेंज या इससे ऊपरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की वोलैटिलिटी/चंचलता नापने के लिए आमतौर पर इंडिया वीआईएक्स सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है। वीआईएक्स की शुरुआत मूलतः शिकागो बोर्ड ऑफ एक्सचेंज (सीबीओई) ने बाज़ार में व्याप्त डर, घबराहट व अनिश्चितता को मापने के लिए 1993 में की थी। उसके बाद इसके फॉर्मूले को 2003 में अपडेट किया गया। भारत में एनएसई इसका इस्तेमाल सीबीओई के लाइसेंस के तहत करता है। इंडिया वीआईएक्स की गणना निफ्टी ऑप्शंस के वर्तमान और अगले महीने के भावोंऔरऔर भी