ट्रेडिंग पूंजी सलामत रखना है तो स्टॉप-लॉस!
जीवन की तरह शेयर बाज़ार में भी कुछ शाश्वत या हमेशा के लिए नहीं होता। इंट्रा-डे वोलैटिलिटी भी धीरे-धीरे पहले की तरह सामान्य रेंज में आती जा रही है। लेकिन जब तक असामान्य है, तब तक इंड्रा-डे ट्रेडर उसका फायदा उठा सकते हैं। मगर ध्यान रहें कि ज्यादा कमाने के फेर में कहीं अपनी ट्रेडिंग पूंजी न गंवा बैठें। ट्रेडर की पूंजी ही उसका सहारा होती है। यह डूब गई तो कमाने का साधन ही खत्म होऔरऔर भी
वोलैटिलिटी में ट्रेडर के लिए सर्फिंग का लुत्फ
दैनिक वोलैटिलिटी ज्यादा हो, सही स्टॉक चुन लिया जाए और दिशा सटीक पकड़ में आ जाए तो इंट्रा-डे ट्रेडर कम शेयर खरीदकर कमाई का लक्ष्य हासिल कर सकता है। किसी को दिन में 5000 रुपए कमाने हैं और स्टॉक एक दिन में 10 रुपए बढ़ता है तो वह उसके 500 शेयर खरीद-बेचकर यह लक्ष्य हासिल कर लेगा। वहीं, अगर स्टॉक दो रुपए बढ़ता है तो उसे 2500 शेयर खरीदने होंगे। व्यावहारिक रूप से क्या तरीका होगा, यहऔरऔर भी
बीटा कमवाता भी है तो पूंजी भी डुबा देता है
स्टॉक का बीटा अगर एक तो वह निफ्टी से लयताल मिलाकर चलता है। एक से कम तो इसमें निफ्टी से कम उछल-कूद। एक से ज्यादा तो निफ्टी से ज्यादा हलचल। मसलन, एचडीएफसी का बीटा 0.96, इनफोसिस का 0.58 तो टाटा मोटर्स का सीधे 2.23 और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का बीटा एक है। ज्यादा बीटा बाज़ार की तुलना में ज्यादा रिस्क दिखाता है। इंट्रा-डे ट्रेडर एक से ज्यादा बीटा वाले टाटा मोटर्स जैसे स्टॉक में ज्यादा कमा सकते हैं।औरऔर भी
निफ्टी के मुकाबले स्टॉक कितना उछले-कूदे!
जो जैसा है, उसे दूसरों से बेहतर देख लेना। उसके हिसाब से खरीदने-बेचने का सौदा करना। यही शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का केंद्रीय सूत्र है। बाकी इधर-इधर की झांकी है। इधर, इंट्रा-डे वोलैटिलिटी बढ़ी हुई है (दो दिन से यह ट्रेन्ड थमता हुआ दिख रहा है) तो इस देख-समझकर ट्रेडिंग रणनीति बनानी होगी। निफ्टी दिन में 200-300 अंक का फेरा मार रहा है तो पता लगाएं कि उसमें कौन-से स्टॉक्स हैं जिनमें ज्यादा हलचल मचऔरऔर भी






