शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का मुख्य सूत्र है जो जैसा है, उसको वैसा ही जानना-समझना। इसके लिए खुद को सारे पूर्वाग्रहों, भावनाओं, धारणाओं या मान्यताओं के चंगुल से मुक्त करना पड़ता है। बस, इस सूत्र को साध लिया तो इंसान के अंदर की लड़कर जीतने की सहज प्रवृत्ति उसे सफलता के हर दांव-पेंच सिखा देती है। ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए फाइनेंस में एमबीए या न्यूटन होना ज़रूरी नहीं। सीधा-सीधा अंकगणित है। वैसे भी हाल-फिलहालऔरऔर भी

अच्छी कंपनी। शेयर 1550 के आसपास। इक्विटी सलाहकार फर्म कहती है कि तीन साल में यह 1460 रुपए तक पहुंच जाएगा। मगर इसे तब खरीदना, जब 36.45% गिरकर 985 तक पहुंच जाए। आपको सालाना 14% का चक्रवृद्धि रिटर्न मिल जाएगा। क्या बेवकूफी है! कंपनी अच्छी है तो उसका शेयर तेज़ी के मौजूदा बाज़ार में इतना गिरेगा क्यों? फिर, 1550 के शेयर के तीन साल में 1460 तक पहुंचने की सलाह का क्या तुक? लेकिन इक्विटी रिसर्च कीऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में कुशलता हासिल करने के लिए आपको बराबर अपने से ही युद्ध करना होता है। तब तक, जब तक आप अपने सहज आवेगों को देखने व परखने नहीं लगते और आपकी दृष्टि वस्तुगत व निरपेक्ष नहीं हो जाती क्योंकि ऐसा होने पर ही आप जो जैसा है, उसे वैसा ही देख पाएंगे। तब आपको यह भी समझ में आएगा कि हर दिन ट्रेडिंग करना ज़रूरी नहीं। समझ में आएगा कि ट्रेडिंग में दुस्साहसऔरऔर भी

हर बिजनेस की अपरिहार्य लागत होती है। खेती तक में बिना लागत लगाए आज कुछ नहीं होता। लेकिन बिजनेस के धुरंधर लोग भी जब वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में उतरते हैं तो उन्हें लागत का होश ही नहीं रहता। वे समझते हैं कि इस बाज़ार की ट्रेडिंग में होशियारी से चलो तो सिर्फ कमाई ही कमाई है और मूर्ख व बावले लोग ही यहां घाटा उठाते हैं। बाद में उन्हें अहसास होता है कि स्टॉप-लॉस ही ट्रेडिंगऔरऔर भी