जो ट्रेडर सेबी के नए नियम के माफिक ज्यादा मार्जिन मनी नहीं दे पा रहे, ब्रोकर उनकी पोजिशन कम कर दे रहे हैं। जाहिर है कि वित्त वर्ष के आखिरी महीने में पहले से धन की तंगी से जूझ रहे ट्रेडर की लॉन्ग या खरीदने की पोजिशन घटती जा रही हैं। नतीजतन बाज़ार बढ़ते-बढ़ते दब जा रहा है। कुछ दिनों से यही सिलसिला जारी है। सुबह बढ़कर खुला बाज़ार दोपहर बाद घाटे में चला जाता है। आखिरीऔरऔर भी

खरीदने के सौदे ज्यादा होगे तो बाज़ार में सक्रियता बढ़ेगी। लेकिन इधर पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने पहली मार्च के पीक मार्जिन की सीमा घटा दी है। पहले इंट्रा-डे में निफ्टी का एक लॉट करने के लिए कोई अपने ब्रोकर के पास डेढ़ लाख रुपए मार्जिन मनी रखता था तो वह दरअसल चार लॉट की पोजिशन बना सकता था। लेकिन अब सेबी के नए नियम के मुताबिक वह दोगुना या दो लॉट की ही पोजिशन बनाऔरऔर भी

इस समय देश में बाहर से आ रहे धन की कोई कमी नहीं। म्यूचुअल फंड भी बाज़ार में धन लगाने को आतुर हैं। लेकिन बाकी ट्रेडरों के पास धन की तंगी है। दो दिन पहले ही अन्य व्यापारियों, कॉरपोरेट इकाइयों व बिजनेस करनेवालों की तरह उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष के एडवांस टैक्स की आखिरी किश्त भरी होगी। सालाना 10,000 रुपए से ज्यादा की करदेयता वाले सभी लोगों को एडवांस टैक्स भरना होता है। इधर, पहली मार्च सेऔरऔर भी

बाज़ार भले ही ऊपर-नीचे होता रहे। लेकिन अमूमन प्रोफेशनल व बड़े ट्रेडर मार्च अंत तक शॉर्ट सेलिंग से परहेज़ करते हैं। असल में वे जिस तरह उधार पर धन लेकर बाज़ार में लगाते रहते हैं, वह सुविधा इस दौरान काफी कम हो जाती है। कहीं से उधार पर धन जुटाना मुश्किल हो जाता है। वित्त वर्ष का अंत होता है तो हर कोई अपना एकाउंट बराबर करने में लगा रहता है। ट्रेडर नया लोन लेने के बजायऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 का आखिरी महीना। एक महीने से निफ्टी लगातार 40 से ज्यादा पी/ई पर ट्रेड हो रहा है केवल एक दिन 26 फरवरी को छोड़कर, जब वो 39.65 के पी/ई पर था। क्या हमारा शेयर बाज़ार कुछ ज्यादा ही फूल गया है और उसका गुब्बारा कभी भी फट सकता है? शायद नहीं, क्योंकि जब तक बाज़ार में धन आता रहेगा, तब तक वह फूलता ही जाएगा। अमूमन, वित्त वर्ष के आखिरी महीने में धन काऔरऔर भी