भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाहर से लाकर सस्ता धन डालते जा रहे हैं। इस साल जनवरी से कल तक उन्होंने हमारे बाज़ार के कैश सेगमेंट में 1,46,377 करोड़ रुपए डाले हैं। वहीं, नवंबर तक के 11 महीनों में म्यूचुअल फंडों ने 28,000 करोड़ रुपए निकाले थे। दिसंबर में कल तक उसके साथ देशी संस्थाओं ने 23,015 करोड़ रुपए और निकाले हैं। जाहिर है सारा गुब्बारा एफआईआई ने फुलाया है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जान-बूझकर बैंकों का लोन न लौटानेवाले मोदीराज में बराबर मनबढ़ होते जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 202-21 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में देश के सबसे बड़े आठ बैंकों के ऐसे लोन 37,000 करोड़ रुपए बढ़ गए हैं, जबकि पिछले साल के इन्हीं छह महीनों में उनके ऐसे लोन लगभग 10,000 करोड़ रुपए बढ़े थे। इस तरह साल भर पहले की तुलना में ऐसे लोन 270 प्रतिशत बढ़ गए हैं। यह सच देश में लोनऔरऔर भी

हर कोई यही बोल रहा है कि शेयर बाज़ार में तेज़ गिरावट आ सकती है। लेकिन जानकारों के मुताबिक, इस महीने ऐसा होने की आशंका बहुत कम है। दरअसल, दिसंबर में म्यूचुअल फंड से लेकर विदेशी निवेशक तक मुनाफा समेटने में व्यस्त रहते हैं। एफआईआई की दिलचस्पी धीरे-धीरे बाज़ार की ट्रेडिंग या निवेश में घटती रही है। उनकी नज़र क्रिसमस की छुट्टियों पर है। वे नए साल में जनवरी से ही सक्रियता बढ़ाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

साल खत्म होने में अब ढाई हफ्ते ही बचे हैं। इसी दौरान देशी म्यूचुअल फंडों से लेकर विदेशी निवेशक संस्थाओं (एफआईआई) तक को अपना हिसाब-किताब सेटल करना होता है। इस संस्थागत निवेशकों का यह रूटीन काम है। लेकिन इसका शेयर बाज़ार पर अहम प्रभाव पड़ता है। दिसंबर म्यूचुअल फंडों के लिए तीसरी तिमाही का अंत है तो वे एनएवी बढ़ाने में जुटे रहेंगे। वहीं, एफआईआई कैलेंडर वर्ष के हिसाब से ही चलते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

चुनिंदा सरकारी कंपनियों और बैंकों को छोड़ दें तो जिस भी कंपनी का नाम आपने सुन रखा होगा, किसी बिजनेस चैनल, अखबार, पत्र-पत्रिका या सोशल मीडिया तक में जिसकी चर्चा भर हो गई हो, उसका शेयर अभी सातवें आसमान पर है। याद करें और स्टॉक्स एक्सचेंज में उसके भाव देखें, आपको यकीन हो जाएगा। खरीदनेवाले टूटे पड़े हैं। उन्माद के इस बवंडर में सबकी नज़रों से ओझल कंपनी खोजना मुश्किल है। तथास्तु में आज एक मामूली कंपनी…औरऔर भी