जान-बूझकर लोन न चुकानेवाले मनबढ़, डिफॉल्ट 270% बढ़े

जान-बूझकर बैंकों का लोन न लौटानेवाले मोदीराज में बराबर मनबढ़ होते जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 202-21 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में देश के सबसे बड़े आठ बैंकों के ऐसे लोन 37,000 करोड़ रुपए बढ़ गए हैं, जबकि पिछले साल के इन्हीं छह महीनों में उनके ऐसे लोन लगभग 10,000 करोड़ रुपए बढ़े थे। इस तरह साल भर पहले की तुलना में ऐसे लोन 270 प्रतिशत बढ़ गए हैं। यह सच देश में लोन लेनेवालों का क्रेडिट स्कोर या साख का लेखा-जोखा रखनेवाली संस्था, ट्रांसयूनियन सिबिल के ताज़ा डेटा से सामने आया है। ट्रांसयूनियन सिबिल का नाम पहले क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड हुआ करता था।

इन आठ बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं। 30 सितंबर 2020 तक देश के सभी बैंकों में जितना विलफुल डिफॉल्ट हुआ है, उसका लगभग 75 प्रतिशत इन्हीं बैंकों पर चढ़ा है। इन आठ बैंकों में विलफुल डिफॉल्ट की रकम 30 सितंबर 2020 तक करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए हो चुकी थी।

अप्रैल से सितंबर 2020 तक अकेले एसबीआई का कुल विलफुल डिफॉल्ट 14,000 करोड़ रुपए या 31.5 प्रतिशत बढ़कर 58,475 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एसबीआई भारत सरकार का प्रमुख बैंकर हैं और सरकारी पहुंच वालों को उससे आसानी से बड़ा लोन मिल जाता है। मसलन, ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद एसबीआई ने अडानी समूह को 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण दे दिया है। इस अवधि में निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक का विलफुल डिफॉल्ट 0.8 प्रतिशत ही बढ़ा है।

बता दें कि विलफुल डिफॉल्टर बैंकों से उन ऋण लेनेवाले को कहा जाता है जो सामर्थ्य होने के बावजूद लोन नहीं लौटाते या जिस काम के लिए लोन लिया हो, उसके बजाय वो धन को कहीं और लगा देते हैं। ध्यान देने की बात है कि कोरोना प्रकोप से पहले दिवालिया प्रक्रिया में समेट लिए जाने के डर के बावजूद बैंकों में विलफुल डिफॉल्ट बढ़े नहीं थे। लेकिन अप्रैल के बाद तो उनकी हालत बद से बदतर होती गई है। इस दौरान केंद्र सरकार ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत नए मामले लेना रोक दिया है। पहले यह रोक 25 सितंबर तक रखी गई और फिर इसे तीन महीने और बढ़ाकर 25 दिसंबर कर दिया गया।

गौलतलब है कि रिजर्व बैंक इस साल अगस्त में जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में पहले ही खुलासा कर चुका है कि बीते वित्त वर्ष 2019-20 में देश में हुए बैंकिंग फ्रॉड 159 प्रतिशत बढ़ गए हैं। मार्च 2019 में बैंकिंग फ्रॉड 71,543 करोड़ रुपए के थे, जबकि यह रकम मार्च 2020 के अंत तक 1,85,644 करोड़ रुपए (ढाई गुना से ज्यादा) पर पहुंच गई।

 

 

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