शेयर बाज़ार हर दिन नए शिखर पर। निफ्टी 37.84 के रिकॉर्ड पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि सेंसेक्स 33.60 के पी/ई पर। एक रुपए के शुद्ध लाभ पर इतना दाम देने का कहीं कोई तुक या औचित्य नहीं दिखता। औसतन 20-22 का पी/ई अनुपात चलता है। लेकिन विदेशियों ने सस्ते धन से बाज़ार को पाटकर भयंकर असंतुलन पैदा कर दिया है। ऐसा असंतुलन, जिसमें जरा-सी अफवाह भयंकर अफरातफरी मचा सकती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अच्छे निवेश के लिए कंपनी की मूलभूत मजबूती, ऋण का बोझ नगण्य या कम से कम होना, बिजनेस की भावी संभावना और प्रवर्तकों की ठीकठाक इक्विटी भागीदारी के साथ-साथ जरूरी है कि उसके शेयर अपेक्षाकृत सस्ते भाव पर उपलब्ध हों। इस शर्त को ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ भी कहते हैं। मगर, आज तो बाज़ार में जिसको देखो, वही चढ़ा हुआ है। ऐसे में ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ वाले स्टॉक्स खोजना बड़ी चुनौती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अमूमन दिसंबर तेजड़ियों का महीना रहता है। लेकिन जनवरी के साथ ऐसा नहीं है। अबकी बार तो और भी नहीं। दुनिया में तमाम राजनीतिक घटनाक्रम आसन्न हैं जो वित्तीय जगत व बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं। जनवरी में यकीनन शेयर बाज़ार में वोल्यूम बढ़ जाएगा। इंट्रा-डे वोलैटिलिटी तो अब भी बढ़ी हुई है। लेकिन तब दिन-ब-दिन की वोलैटिलिटी भी वापस लौट आएगी। ट्रेडरों और निवेशकों को तब अपनी चौकसी बढ़ा देनी होगी। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

इतना निवेश कर चुकने के बाद विदेशी निवेशक इस महीने धीरे-धीरे सुस्ती ओढ़ते जा रहे हैं। इससे बाज़ार में नकदी या लिक्विडटी के कम होते जाने का रिस्क बढ़ता जा रहा है। कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में घटते वोल्यूम में यह दिखने भी लगा है। वैसे, हर साल दिसंबर में ऐसा होता रहता है। इससे बड़े ट्रेडरों को ऑर्डर पूरा करने में काफी दिक्कत होती है। लेकिन छोटों पर खास फर्क नहीं पड़ता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भाषण दिया था कि देश को जनसंख्या विस्फोट से निपटना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जो लोग छोटा परिवार रख रहे हैं, वह भी एक प्रकार की देशभक्ति है। लेकिन 13 दिसंबर 2020 को मोदी सरकार इस ‘देशभक्ति’ से पलट गई। उसने देश में दो बच्चों का मानक लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाऔरऔर भी