शेयर बाज़ार पैटर्न और संख्याओं की जिस भाषा में आपसे बात कर रहा है, उसे समझते हैं तो आप दूसरे ट्रेडरों पर हमेशा बीस पड़ेंगे। उन्नीस पर बीस पड़ना ही ट्रेडिंग में आपको जीत दिलाता है। देशी-विदेशी संस्थाएं भारी धन का खेल खेलती हैं और उसके दम पर बाज़ार की दशा-दिशा तय करती है। लेकिन उनका हर सौदा भावों के उतार-चढ़ाव में झलक जाता है जिसे आप थोडी-सी समझ से पकड़ सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रेत पर पड़े कदमों की तरह शेयर बाज़ार का हर सौदा अपने डिजिटल निशान हर तरफ छोड़ जाता है। ट्रेडिंग स्क्रीन पर भाव बदलते रहते हैं। एक्सचेंज भावों के पैटर्न को हर तरीके से समझने की कुजी पेश करता है। बदलते पैटर्न और संख्याओं की भाषा में बाज़ार बराबर आपको संदेश देता रहता है। यह भाषा जानकर बाज़ार के संकेत समझ लें तो वह आपकी मुठ्ठी में होगा। किसी टिप्स/सलाह की ज़रूरत नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े लोग खुद मेहनत नहीं करना चाहते। आंख, कान व बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। अन्यथा, आज तो हमारा सारा बाज़ार डिटिजल हो चुका है। एकदम पारदर्शी। जो हो रहा है, सब आंखों के सामने। बल्क व ब्लॉक-डील से लेकर देशी व विदेशी संस्थाओं तक की खरीद-फिरोख्त का सारा डेटा अगले दिन की ट्रेडिंग से पहले आपकी स्क्रीन पर होता है, बस दो-चार क्लिक के बाद। अब मंगलवार की दृष्टि..औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग उन्हीं लोगों को करनी चाहिए, जिनके पास अपनी सारी तात्कालिक और आकस्मिक ज़रूरतों का इंतज़ाम कर लेने के बाद भी इफरात धन बचता है। लेकिन यहां केवल वही लोग नहीं जाते जिनके पास इफरात धन है, बल्कि ज्यादातर ऐसे लोग आते हैं जो अपने सीमित धन को इफरात बनाना चाहते हैं। वे हमेशा किसी मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े रहते हैं जो उन्हें रातोंरात धनवान बना दे। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

रिजर्व बैंक को जीडीपी के 9.5% घटने का अंदेशा है। लेकिन मोदी सरकार बेधड़क कहती है कि उसने अर्थव्यवस्था व अवाम के कल्याण के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन। 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज। वह टीसीएस और एचडीएफसी के अच्छे नतीजों को भी अपनी उपलब्धि बताती है। देश अगर वाकई शिक्षित होता तो सरकार इतनी हवाबाज़ी नहीं कर पाती। आज तथास्तु में शिक्षा व्यवसाय से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी