ट्रेडिंग के लिए बाज़ार के सामान्य होने का इंतज़ार करना चाहिए। इस बार बाज़ार गिरा तो गहरा आघात लगा सकता है। लेकिन कहां तक गिरने पर बाज़ार को सामान्य या स्थिर माना जाएगा। जानकारों के मुताबिक, निफ्टी गिरते-गिरते जब 11,200 से 11,350 की रेंज में आ जाए, तब माना जाएगा कि वह सामान्य अवस्था में लौट आया। फिलहाल ऐसा होने में देर है। तब तक रिटेल ट्रेडरों को दूर से तमाशा देखना होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

यह सावधानी बरतने का दौर है क्योंकि शेयर बाज़ार अर्थव्यवस्था या कंपनियों की ताकत पर नहीं, बल्कि तुरत-फुरत मुनाफा कमाने के लिए लगी उधार की पूंजी के दम पर उछल रहा है। यह भी रिवाज़ है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों तक बाज़ार को जबरन चढ़ाकर रखा जाता है। ऊपर से इधर कोरोना का नरम-गरम जारी है। ठंड बढ़ने पर कोरोना का प्रकोप विकट होने की आशंका है। फिर ट्रेड ही क्यों करें? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भीषण है यह दुष्चक्र। ज्यादा उफान ट्रेडरों को किनारे लगा देता है। लेकिन किनारे लगे ट्रेडर ज़ोर से पलटते हैं। इस छपाक-झपाक में उफान और ज्यादा बढ़ जाता है। दैनिक वोलैटिलिटी या चंचलता पहले से ज्यादा हो जाती है। हमें VIX सूचकांक से नापी जाने वाली और इस सांख्यिकी चंचलता का अंतर समझना होगा। इस समय VIX वाली वोलैटिलिटी घटकर 20-22% की रेंज में आ चुकी है जिसे खतरनाक नहीं माना जा सकता। अब बुद्ध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की शांत और उफनती धारा में क्या अंतर है? मोटेतौर पर जब निफ्टी दिन में 90-100 अंकों के दायरे में चले तो बाज़ार की धारा शांत मानी जा सकती है। वहीं, जब वह 120 अंकों के ज्यादा के दायरे में उछलता-कूदता है, तब बाज़ार की धारा उफनती मानी जा सकती है। फिलहाल औसतन यही स्थिति चल रही है। ट्रेडरों को घाटा, फिर उसे कवर करने की मशक्कत। बनता जाए घनघोर दुष्चक्र। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

आसानी से कमाना कौन नहीं चाहता! लेकिन शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना हर किसी के बूते की बात नहीं। यहां हाथी जैसी सुस्ती नहीं, चीते जैसी फुर्ती चाहिए। नहीं तो बाज़ार के मगरमच्छ पलक गिरते आपको निगल जाएंगे। शेयर बाज़ार ऐसा शांत तालाब नहीं कि कांटा लगाकर बैठ गए और इंतज़ार किया तो मछली हाथ लग जाएगी। यहां तो ट्रेडर उफनती धारा में शिकार करते हैं। जितना ज्यादा उफान, उतनी ज्यादा कमाई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी