काम से कमाना, बाज़ार से बढ़ाना
कहावत है कि गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की तरह भागता है। अपने यहां लोगों की नौकरी छूटती है तो वे शेयर बाज़ार की तरफ भागते हैं। खुद नहीं तो बीवी से चाहते हैं कि वह ट्रेडिंग/निवेश से कुछ कमाकर लाए। भूल जाते हैं कि शेयर बाज़ार आम लोगों के लिए कमाने का नहीं, बल्कि जो पहले से कमा रखा है, उसे बचाने या बढ़ाने का जरिया है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
लॉन्ग व शॉर्ट सौदों के हैं अपने दबाव
डेरिवेटिव सेगमेंट में शॉर्ट और लॉन्ग दोनों तरह के सौदे लीवरेज्ड होते हैं। जितना धन लगाया है, उससे कहीं ज्यादा बड़ा असल सौदा होता है। लेकिन मार्क-टू-मार्केट भुगतान के दबाव में लॉन्ग सौदे करने वाले ट्रेडर को मजबूरी में अपनी पोजिशन छोड़नी होती है तो बाज़ार गिर जाता है। वहीं, शॉर्ट सेलिंग करने वाले ट्रेडर को अक्सर अपनी पोजिशन कवर करने के लिए घबराहट में खरीदना पड़ता है तो बाज़ार चढ़ जाता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
इधर बेचने वाले भी बढ़ा रहे हैं बाज़ार
बाज़ार की सांस इधर बहुत तेजी से उठ-गिर रही है। निफ्टी प्रतिदिन औसतन 120 से 160 अंक ऊपर-नीचे होता है। सीमित खरीद में बाज़ार चढ़ता है तो भारी वोल्यूम के साथ गिर जाता है। इस समय हालत यह है कि गिरते वक्त केवल कैश सेगमेंट में ही वोल्यूम नहीं बढ़ता, डेरिवेटिव सेगमेंट में ओपन इंटरेस्ट भी बढ़ जाता है। मतलब, शॉर्ट सेलिंग करनेवाले बाज़ार गिरने की उम्मीद में सौदे बढ़ाते जा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
उधारी जैसा ही खेल डेरिवेटिव सौदों में
विदेशी निवेशक बाहर से सस्ते उधार का धन ला रहे हैं। देशी संस्थाएं आम लोगों से सस्ते में मिला धन लगा रही हैं। अपने बाज़ार में उधारी का एक अलग खेल डेरिवेटिव सौदों के रूप में चलता है जिन्हें लीवरेज्ड सौदे भी कहते हैं। एक रुपए लगाकर पांच से बीस गुना ज्यादा रकम का सौदा। कैश ही नहीं, फ्यूचर्स सेगमेंट में भी मार्जिन का जबरदस्त खेल। भाव बढ़े तो मार्क-टू-मार्केट की लटकी तलवार। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी







