बाज़ार ज्यादा न गिरे, इसके लिए पूंजी बाज़ार नियामक, सेबी ने भी उपाय कर रखे हैं। आपको पता ही होगा कि बाज़ार के गिरने पर शॉर्ट-सेलिंग आग में घी का काम करती है। नतीजतन, बाज़ार और ज्यादा गिरता जाता है। सेबी ने इस पर बैन नहीं लगाया, लेकिन इसे इंडेक्स डेरिविव्स तक सीमित कर दिया है। साथ ही उसने चलने वाले शेयरों पर मार्जिन काफी बढ़ा और मार्केट-वायड पोजिशन लिमिट घटा दी है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

अब तक देशी निवेशक संस्थाओं, खासकर म्यूचुअल फंडों ने अपने शेयर बाज़ार को ज्यादा गिरने से रोक रखा था। विदेशी निवेशक तो पहले से बेचे जा रहे हैं। ऐसे में अब बाजार को गिरना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार अपनी बिगड़ती छवि के बीच शायद ऐसा नहीं होने देगी। इस मसकद को पूरा करने के लिए उसके पास एलआईसी जैसी शानदार संस्था है जो उसके इशारे पर बाज़ार में जमकर अरबों झोंक सकती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अमेरिकी चुनावों का विश्व बाज़ार के साथ-साथ भारतीय बाज़ार पर कुछ न कुछ असर तो पड़ना ही है। लेकिन खुद हमारे बाज़ार को अभी प्रभावित करनेवाले कारक क्या हैं? जून तिमाही का अंत आने के साथ ही इधर म्यूचुअल फंडों ने बाज़ार में ज्यादा खरीद की है क्योंकि उन्हें अपना तिमाही एनएवी चमकाकर दिखाना था। अगर ऐसा न हुआ होता तो हमारा बाज़ार ज्यादा गिर गया होता। फिलहाल, वह दबाव मिट गया है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी