न खोजें ठंडे शेयरों में ट्रेडिंग की गर्मी
अचानक कोई जान-पहचाना शेयर उछल जाए और उस पर नजर भी पड़ी हो तो लगता है कि काश! हमने इसमें ट्रेड किया होता तो एक ही दिन में 10% से ज्यादा कमा लेते। बीते हफ्ते इन्फोसिस और रैलिस इंडिया के साथ ऐसा ही हुआ। लेकिन अचानक होनेवाली चीज़ों को ट्रेडिंग के नियम में नहीं बांधा जा सकता। मोटेतौर पर ध्यान रखें कि ट्रेडिंग उन्हीं स्टॉक्स में करनी चाहिए जिनमें अच्छा-खासा टर्नओवर होता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
हमारे हॉर्मोन का पिछलग्गू है बाज़ार
कहते हैं, शेयर बाज़ार को कोई पकड़ नहीं सकता। पर उसका स्वभाव तो वहां सक्रिय इंसानों की हरकत से ही बनता है। इंसान लालच व डर की भावना और इनसे जुड़े एड्रेनलीन और कोर्टिज़ोल हॉर्मोन का वशीभूत होकर बाज़ार में उतरता है। तुरत-फुरत में ये भावनाएं और हॉर्मोन इंसान का माथा घुमा देते हैं। लेकिन लंबे समय में उसका दिमाग ठिकाने आ जाता है। शेयर बाज़ार का भी यही बर्ताव है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
चौतरफा नज़रिया होने से राह आसान
कहना या बता देना बहुत आसान है। लेकिन करना कितना मुश्किल है, इसे सचमुच ट्रेडिंग करनेवाला ही जानता है। अनुमान गलत होने पर उसे भारी चपत लगती है। इससे बचने के लिए हमें वित्तीय बाज़ार का चौतरफा 360 डिग्री का नज़रिया रखना होता है। हर समय आंख, कान, दिमाग खुला रखना पड़ता है। इससे हम व्यापक तस्वीर बना सकते हैं। उसके बाद टेक्निकल व डेटा एनालिसिस से उसे फाइन ट्यून कर सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
सावधानियां व साधन इंट्रा-डे ट्रेडर के
शेयरों के दैनिक भाव खबरों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। लेकिन खबरों का पता रिटेल ट्रेडर को पहले से हो नहीं सकता। ऐसे में इंट्रा-डे ट्रेडर को मजबूरन भावों के चार्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्हें 1, 5, 15, 30 व 60 मिनट के चार्टों के साथ ही दैनिक भावों का चार्ट भी देखना चाहिए। इससे स्टॉक की समग्र चाल के मद्देनज़र लक्ष्य और स्टॉप-लॉस तय करना आसान हो जाएगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







