सही-गलत बाद में, पहले सच तो जान
पुष्टि पूर्वाग्रह की सहज मानवीय प्रवृति से उपजे तेजड़ियों और मंदड़ियों का एकसाथ शेयर बाज़ार में होना ही उसकी धड़कन है, सांस है। इसी प्रवृत्ति पर समूचे बाज़ार की कार्यप्रणाली टिकी हुई है। जिस किसी को भी शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना है, उसे खुद के सही या गलत होने की पड़ताल में पड़ने के बजाय बाज़ार में हरेक पल काम कर रहे इस सहज मनोविज्ञान को अच्छी तरह सोख लेना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी





