पुष्टि पूर्वाग्रह की सहज मानवीय प्रवृति से उपजे तेजड़ियों और मंदड़ियों का एकसाथ शेयर बाज़ार में होना ही उसकी धड़कन है, सांस है। इसी प्रवृत्ति पर समूचे बाज़ार की कार्यप्रणाली टिकी हुई है। जिस किसी को भी शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना है, उसे खुद के सही या गलत होने की पड़ताल में पड़ने के बजाय बाज़ार में हरेक पल काम कर रहे इस सहज मनोविज्ञान को अच्छी तरह सोख लेना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जो पहले शेयर खरीद चुके होते हैं, वे चाहते हैं कि बाज़ार बराबर बढ़ता रहे। वे स्वभावतः तेजड़ियों के खेमे में चले जाते हैं। वहीं, जिन्होंने पुट-ऑप्शन खरीद रखे होते हैं, जो शॉर्ट-सेलर हैं यानी शेयर पहले बेच चुके होते हैं, वे मंदड़ियों का खेमा मजबूत करते हैं। वे चाहते हैं कि बाज़ार गिरता जाए ताकि पुट-ऑप्शन महंगा हो और सस्ते में शेयर खरीदकर पहले किया गया बेचने का सौदा पूरा कर सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जिन्हें लगता है कि बाज़ार यहां से बढ़ने ही बढ़नेवाला है, जो तथ्यों/आंकड़ों की परवाह किए बगैर खरीदने में लगे रहते हैं, उन्हें बुल या तेजड़िया कहा जाता है। वहीं, जिन्हें लगता है कि बाज़ार आगे कतई नहीं बढ़ेगा और जो तथ्यों/आंकड़ों की परवाह किए बिना बेचने में लगे रहते हैं, उन्हें बियर या मंदड़िया कहा जाता है। तेजड़िए और मंदड़िए, दोनों पुष्टि पूर्वाग्रह की बेतुकी प्रवृत्ति के शिकार हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

स्वतंत्र बाज़ार में सौदा संपन्न होने के लिए ज़रूरी है कि खरीदने और बेचनेवाले एकसाथ मौजूद हों। शेयर बाजार में हर पल यही होता है। कुछ लोग अपने शेयर बेचने पर उतारू रहते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें खरीदने को तत्पर रहते हैं। एक को लगता है कि इस वक्त बेचने में फायदा है क्योंकि शेयर यहां से ज्यादा नहीं बढ़नेवाला, जबकि दूसरे को लगता है कि शेयर यहां से जमकर बढ़नेवाला है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जो हमारे मन में होता है, उसे ही हम अक्सर तथ्यों/आंकड़ों से पुष्ट करने में लगे रहते हैं बगैर यह परखे कि तथ्य/आंकड़े सचमुच क्या कह रहे हैं। मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को कन्फर्मेशन बायस या पुष्टि पूर्वाग्रह कहते हैं। इस पूर्वाग्रह के चलते हम अपनी धारणा के खिलाफ जानेवाले हर तथ्य/आंकड़े को नकारते रहते हैं। यह प्रवृत्ति यकीनन गलत है। लेकिन इसके बिना शेयर बाज़ार में कोई काम ही नही हो सकता। अब सोम का व्योम…औरऔर भी