बीएसई सेंसेक्स 1 जनवरी 1980 से 31 दिसंबर 2018 के बीच 118 से 36,068 पर पहुंच गया। 39 सालों में 306 गुना। 15.8% सालाना चक्रवृद्धि दर। अर्थव्यवस्था से ज्यादा बढ़ा। पर अलग-अलग साल को देखें तो उसने गठबंधन सरकार में सबसे ज्यादा और सबसे कम रिटर्न दोनों दिए हैं। एकदलीय सरकार में भी यही हाल रहा। साफ है कि सरकार के स्वरूप और शेयर बाज़ार के रिटर्न में कोई सीधा रिश्ता नहीं है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था 1980 के बाद 39 सालों में अब तक बराबर बढ़ती रही है। अगर हम उसकी विकास दर से मुद्रास्फीति की दर न घटाए और उसे सम-मूल्य पर लें तो वह अगर 1980 में 100 रुपए की थी तो अब 11,000 रुपए की हो चुकी है। 110 गुनी वृद्धि, 12.8% की सालाना चक्रवृद्धि दर। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स कितना बढ़ा है? क्या उसके रिटर्न का कोई रिश्ता सरकारों के स्वरूप से है? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव का पहला चरण पूरा हो गया। इसमें बीस राज्यों की 91 सीटों पर वोट डाले गए। इस हफ्ते गुरुवार, 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है। इसमें 13 राज्यों की 97 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। देश की धुकधुकी 23 मई को आनेवाले चुनाव नतीजों पर लगी हुई है। लेकिन जो भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताकत को जानते हैं, उन्हें पता है कि उसका बढ़ना नहीं रुकेगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

सारा देश चुनावों के राग में डूबा हुआ है। हर तरफ राजनीति का शोर। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अभी तक हमारी अर्थव्यवस्था राजनीति की परवाह किए बिना बढ़ती रही है और उसी से जुड़ा है हमारा शेयर बाज़ार। हालांकि इधर चुनाव नतीजों की अनिश्चितता के बीच बाज़ार में छोटी कंपनियों के शेयर ज्यादा ही गिर गए हैं। लेकिन अनिश्चितता के हटते ही उनके उठने की भरपूर संभावना है। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी