मीरा की मुक्ति नहीं

4 Comments

  1. Ye galt ahe agar Meera ko moha hota to o aajivan bhagwan Shri Krishna na ki bhagti or prem nahi krti ….to fir Radha ko bhi moha hona chai ye to fir aap ye bhi kahi ye ki Radha bhi mukt nahi he….Meera ki bhakti nisavrth thi or o bhgwan me samai hue he usko mukt hone ki Kay aavshkta he….

  2. Author

    पहले यह समझें कि मुक्ति का मतलब क्या है? राग, द्वेष व मोह ही हमें इस भव संसार से बांधते हैं और मन
    इस बंधन का माध्यम बनता है। जब आप मन को राग, द्वेष व मोह से मुक्त कर लेते हैं तो इस भव संसार से आपकी कोई इच्छा नहीं बचती। इच्छाओं के खत्म होते ही आप जीवन-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की तरफ बढ़ जाते हो। मेरा कहने का तात्पर्य यही था कि मूल को समझा जाए और प्रतीकों में न उलझकर रह जाया जाए।

  3. देखिए मीरा तो कृष्ण की मूर्ति में समाई हुई है तो क्या भगवान मे समाजाने के बाद भी कोई मुक्त नही? बस मुझे आपसे यही कहना था …

  4. Author

    आपकी बात सही है। लेकिन मरने के बाद तो सभी भगवान में समा जाते हैं। फिर भी मुक्त नही होते। फिर अपने यहां भगवान कोई अलग नहीं, बल्कि इंसान का उच्चतर रूप माना गया है। पाली भाषा का श्लोक है –
    भग्ग रागो, भग्ग दोसो, भग्ग मोहो अनासवो।
    भग्गस्य पापका धम्मा भगवा तेन पबुच्चति।।
    अर्थात, जिसने अपने अंदर के राग, द्वेष व मोह को भग्न कर लिया हो और आश्रवहीन भाग्यवान होकर इसी जीवन में विमुक्ति के वैभव का ऐश्वर्यमय जीवन जीता हो, वही भगवान कहलाता है।

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