कल और कल के बीच झूलने के बजाय आप जब आज और अभी में जीने लगते हो तब तमाम गिले-शिकवों, परेशानी और बिखरे-बिखरे रहने की स्थिति से मुक्त हो जाते हो। तब आपका ध्यान भटकता नहीं। आप हर काम पूरा ध्यान लगाकर करते हो और सार को पकड़कर थोथी चीजें उड़ा देते हो। तब आपका ज़ोर हमेशा जमीनी हकीकत और वास्तविकता को जानने पर रहता है। इसका लाभ ट्रेडिंग में भी मिलता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार व भावनाओं में संतुलन आने लगता है और जो जैसा है, उसे आप वैसा ही देखने लगते हैं। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

अवचेतन मन में बैठी नकारात्मक धारणाओं, विचारों और भावनाओं से समय रहते कैसे निजात पा ली जाए, यह बड़ा अहम मसला है। उनसे मुक्ति न पाई गई तो वे बड़ी घातक हो सकती हैं। इसे रोकने का पहला उपाय है कि हम अपने अंतर्मन के प्रति सचेत हो जाएं। पता लगाएं कि हमारे अंदर जाने-अनजाने क्या-क्या चलता रहता है। आंख मूंदने से यह काम नहीं होगा। हां, आनापान ध्यान इसका कारगर तरीका है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का हाल इस समय बड़ा विचित्र है। सेंसेक्स ऐतिहासिक शिखर पर है। लेकिन उसमें शामिल 30 में से 22 कंपनियों के शेयर दबे पड़े हैं। कुछ दिनों पहले स्मॉल-कैप सूचकांक 14 महीनों के न्यूनतम स्तर पर चला गया। इनमें से कुछ स्टॉक तो 90% तक गिर गए। ऐसे माहौल में अच्छी कंपनियों चुनने का रास्ता कतई सीधा-सरल नहीं हो सकता। लेकिन नज़र वालों के लिए मौके कम नहीं हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी