अगर आप मानते हैं कि विचार हमेशा सचेत व तार्किक होते हैं तो गलत हैं। विचार अधिकांशतः दिमाग में चल रही कल्पनाओं, मान्यताओं, पूर्वाग्रहों, मूल्यों व नजरिए के घात-प्रतिघात का नतीजा होते हैं। ये तमाम विचार हमारे लिए फायदेमंद या आत्मघाती हो सकते हैं। दुर्भाग्य से ज्यादातर विचार आत्मघाती होते हैं क्योंकि हम उस दौर में रह रहे हैं जब राजनीति से लेकर अर्थनीति व समाज में झूठ व प्रपंच का बोलबाला है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हमारा अवचेतन मन ही मूलतः हमारे विचारों, भावनाओं व बर्ताव का फैसला करता है। यकीनन इसमें चेतन मन का भी योगदान होता है। लेकिन चेतन मन का मुख्य काम किसी रथ के सारथी या कार के ड्राइवर जैसा है। वो अवचेतन मन को जितना बेहतर ट्रेनिंग देगा, उसे जितना रवां रखेगा, उसके विचार, भावना व बर्ताव उतने ही ज्यादा सच या यथार्थ पर आधारित होंगे और वह उतने ही अच्छे नतीजे हासिल करेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

निफ्टी व सेंसेक्स ने शुक्र को नया ऐतिहासिक शिखर बना लिया। पर उस दिन उनके साथ जितनी कंपनियों ने नई चोटी पकड़ी, उससे लगभग दो गुनी कंपनियों ने नया तला छू लिया। इनमें कुछ अच्छी कंपनियां भी शामिल हैं। बाज़ार की चढ़ाई में लंबे निवेश की संभावना ऐसी ही अच्छी, मगर नीचे पड़ी कंपनियों में छिपी होती है। सतह पर छाग ही तैरता है, जबकि मोती तलहटी में पड़े मिलते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हमारे मन, मस्तिष्क व शरीर में हर क्षण लाखों सूचनाएं प्रोसेस होती हैं। शरीर की दस लाख कोशिकाओं में से हर कोशिका में प्रति सेकेंड कम से कम एक लाख प्रतिक्रियाएं होती हैं। इन सबके घात-प्रतिघात से हमारे विचारों से लेकर भावनाओं और बर्ताव का फैसला होता है। हमें केवल अपने चेतन मस्तिष्क का भान रहता है। बाकी सब कुछ हमारे लिए अनजाना है। सफलता के लिए इन अनजाने को जानना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जो लोग अल्गोरिदम ट्रेडिंग करते हैं, उनकी बात अलग है क्योंकि उनके लिए सारा काम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कर देता है। लेकिन आम ट्रेडर खरीदने व बेचने के जो भी सौदे करता है, उसका सारा फैसला पहले उसके दिमाग में होता है। इसलिए उसे हमेशा यह हकीकत याद रखनी चाहिए कि उसके दिल-दिमाग, मन व शरीर का 95% से 97% काम उसके चेतन से बाहर है जिसे उसका अवचेतन या अचेतन दिमाग चलाता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी