नहीं पता कि शेयर बाज़ार में सक्रिय कितने लोगों ने विपश्यना साधना अपनाई है। लेकिन एनाम ग्रुप के चेयरमैन वल्लभ भंसाली का नाम इस बाबत काफी चर्चित है। वे 1989 से विपश्यना कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाज़ार के बेहद शांत व सफल कारोबारियों में शुमार हैं। अगर किसी को भागमभाग में फंसे बगैर पूरी शांति से शेयर बाज़ार से कमाई करनी हो तो वह वल्लभ भंसाली से बहुत कुछ सीख सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

चेतन व अवचेतन मन के बीच की लौह दीवार को भेदने की बड़ी व्यावहारिक विद्या गौतम बुद्ध ने वैदिक शिक्षाओं को मथने के बाद गहन आत्मसाधना से खोजकर निकाली थी। इस विपश्यना साधना ने तब आम से लेकर खास, सभी लोगों का भला किया। लेकिन करीब 2500 साल पहले पुरोहितों ने इसे गायब कर दिया। वह विद्या अब भारत में वापस आ गई है। ट्रेडरों के लिए यह विद्या बड़े काम की है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

राजनीति सेवाभाव से करो तो उसमें त्याग ही त्याग है। लेकिन स्वार्थ के लिए करो तो आज हमारे देश का सबसे शानदार धंधा है। इतना जबरदस्त रिटर्न किसी बिजनेस में भी नहीं। फिर भी राजनीति को पांच साल के चक्र से गुजरता पड़ता है। इसी तरह कपास, सीमेंट, स्टील, तांबा व क्रूड ऑयल जैसे हर जिन्स से जुड़े उद्योग और उनमें सक्रिय कंपनियों को भी चक्र से गुजरना पड़ता है। आज ऐसे ही उद्योग की एक कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग इसलिए कर रहे हैं ताकि बाज़ार से कमा सकें। मगर पूंजी ही न रही तो कमाएंगे कैसे और किससे? इसलिए अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलनी है, यह लक्ष्य बहुत साफ होना चाहिए। इस लक्ष्य से जो भी भावनाएं भटकाती हैं, उनके प्रति आप जितना सचेत होते जाएंगे, पूर्वाग्रहों से मुक्त होते जाएंगे, उतना ही आपका निर्णय तर्क व तथ्यपरक होता जाएगा। बाकी बचा बाज़ार का जोखिम तो धीरे-धीरे उसे भी साध लेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

नकारात्मक विचारों, मान्यताओं और भावनाओं की फांस से निकलकर जब आप जो जैसा है, उसे यथाभूत देखने में समर्थ हो जाते हो तो आपको अपने कर्म की कमियां खुद ही दिखने लग जाती हैं। तब प्रतिक्रिया करने के बजाय आप क्रिया को अधिक महत्व देते हो। दूसरों या हालात पर तोहमत लगाने के बजाय अपनी कमियों को दूर करने लगते हो ताकि बाज़ार की प्रतिस्पर्धा में आप हर उन्नीस पर बीस पड़ सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी