कंपनी का मुनाफा बढ़ रहा हो और उसका शेयर गिरा हुआ हो तो उसे खरीद लेना चाहिए। अगर मुनाफा बढ़ता रहे, फंडामेंटल्स मजबूत रहें और शेयर चढ़ रहा हो तो उसमें बने रहना चाहिए। वहीं, कंपनी का लाभ घटने लगे और शेयर गिरने लगे तो फौरन बेचकर निकल लेना चाहिए। अगर लाभ घटने के बावजूद कंपनी का शेयर बढ़ रहा हो, तब भी उससे निकल लेने में ही समझदारी है। आज तथास्तु में दो कंपनियों का जिक्र…औरऔर भी

हम कभी-कभी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस को मिला देते हैं। सोचते हैं कि कंपनी का फंडामेंटल सॉलिड है, तो उसका शेयर पक्का बढ़ेगा। लेकिन इस बढ़त में महीनों नहीं, सालों लग सकते हैं, जबकि ट्रेडिंग का सौदा कुछ दिनों या एकाध महीने का होता है। बाज़ार बंद होने के दिन शनिवार को आए शानदार नतीजों के बावजूद सोमवार को कंपनी का शेयर गिर जाता है क्योंकि उसमें मांग सप्लाई से कम होती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग से पहले ज़रूरी है कि मन को एकदम साफ व निर्मल कर लिया जाए ताकि बाहर जो चल रहा है, उसकी सही तस्वीर उसमें बन सके। मन को साफ करने का काम आप गौतम बुद्ध द्वारा खोजकर निकाली गई विपश्यना साधना के नियमित अभ्यास से कर सकते हैं। शेयर बाज़ार में जो चल रहा है, वो भावों के चार्ट में दिखता है जिसे डिकोड करने की आंशिक कला टेक्निकल एनालिसिस सिखाती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर आपको लगता है कि वॉरेन बफेट, जॉर्ज सोरोस या राकेश झुनझुनवाला के तरीके आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सफलता दिला देंगे तो यह आपका कोरा भ्रम है। यहां पर हर किसी को अपने रिस्क प्रोफाइल, पूंजी, मानसिक बुनावट व स्वभाव को ध्यान में रखते हुए खुद का ट्रेडिंग स्टाइल गढ़ना होता है। हमारे शेयर बाज़ार की क्या खासियत है, यहां किस तरह के लोग सक्रिय हैं, यह सब समझना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी