बिजनेस में चलता है सच का दम
झूठ ज्यादा नहीं चलता। देर-सबेर उसका बेड़ा गरक हो जाता है। यह नियम निजी जीवन से लेकर राजनीति और बिजनेस तक पर लागू होता है। सत्यम कंप्यूटर्स को उसका झूठ ही ले डूबा। दो साल पहले निर्यात पर निर्भर एक नामी कंपनी का धंधा इसलिए मार खा गया क्योंकि अमेरिकी ग्राहकों को पता चल गया कि वो झूठ बोलती है। सत्य ही अंततः जीतता और चलता है। अब तथास्तु में सच के दम पर खड़ी एक कंपनी…औरऔर भी
विदेश निवेशक बराबर खींच रहे हाथ
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत में शुद्ध रूप से मुनाफा कमाने आए हैं, अर्थव्यवस्था या शेयर बाज़ार को चमकाने के लिए नहीं। देश-विदेश की मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने चालू वित्त वर्ष 2018-19 के अप्रैल माह में हमारे शेयर बाज़ार व बांडों से 15,561.48 करोड़ रुपए निकाले थे। उसके बाद कल 17 मई तक वे 17,897.84 करोड़ रुपए और निकाल चुके हैं। गनीमत है कि घरेलू संस्थाओं ने बाज़ार को संभाल रखा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
शेयर चढ़े, पर पस्त हैं छोटी कंपनियां
बड़ी कंपनियों ने धंधा किसी तरह संभाल लिया है। पर, छोटी कंपनियों की हालत खस्ता बनी हुई है। पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में शामिल कंपनियों का औसत इक्विटी पर रिटर्न मात्र 3% रहा था। इससे पिछले दो सालों में भी यह क्रमशः 2% और 3% रहा था। 2017-18 का हाल शायद ही कोई चमत्कार दिखाए। फिर भी बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 78.25 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
देखते जाएं कंपनियों के तिमाही संदेश
कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों का दौर चल रहा है। कल व परसों हिंदुस्तान यूनिलीवर, बॉम्बे डाइंग, एब्बट इंडिया, ल्यूपिन, पंजाब नेशनल बैंक, ब्रिटानिया, आर कॉम व सिंडीकेट बैंक के नतीजे आए तो आज से लेकर शुक्र तक हिंडाल्को, टाटा स्टील, आईटीसी, वोल्टाज़, जे के टायर, अशोक लेलैंड, बजाज ऑटो, डालमिया भारत व डेन नेटवर्क्स जैसी कई कंपनियों के नतीजे आने हैं। देखना यह है कि ये नतीजे क्या कह रहे हैं। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी







