आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 या आकलन वर्ष 2015-16 में शेयर बाज़ार से हुई आय पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देने या घाटा क्लेम करनेवाले ट्रेडरों की संख्या 38.19% बढ़ गई। हम इसके आधार पर आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि बाद के ढाई सालों में हमारा शेयर बाज़ार जिस तरह से बढ़ा है, उसमें सक्रिय ट्रेडरों की संख्या बराबर ऐसी ही तेज़ी से बढ़ रही होगी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी

तीन करोड़ डीमैट खातों में से 50 लाख ट्रेडर। इस तरह देश में फिलहाल कुल डीमैट खाताधारकों में से करीब 16% ट्रेडर हैं। इनमें से करीब 15% ही शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दे या घाटा क्लेम कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में 2.41% निवेशक ही ट्रेडिंग से दिखा सकने लायक आय कमा रहे हैं। हालांकि शेयर बाज़ार से हुई आय पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देनेवालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडर उन्हें माना जाएगा जो साल भर के भीतर शेयर बेच देते हैं। आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान देश में सक्रिय ट्रेडरों की संख्या करीब 50 लाख थी। इनमें से 7.34 लाख ट्रेडरों ने शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स भरा या घाटा क्लेम किया था। शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर 15% है, जबकि साल भर बाद बेचने पर कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हमारे यहां शेयर बाज़ार में कितने लोग सक्रिय ट्रेडिंग करते हैं? दोनों डिपॉजिटरी कंपनियों के सम्मिलित आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल डीमैट खातों की अद्यतन संख्या 3.04 करोड़ है। माना जा सकता है कि शेयर बाज़ार के निवेशकों की संख्या इसी के आसपास होगी। वैसे, बीएसई के मुताबिक निवेशकों की मौजूदा संख्या 3.72 करोड़ है। अंदाज़ लगाइए कि इनमें से कितने लोग महीने में कम से कम एक बार ट्रेडिंग करते होंगे? अब सोम का व्योम…औरऔर भी