चक्रवात हो या सुनामी, उसके आगे छोटे-बड़े या अमीर-गरीब, सभी का रिस्क एक जैसा होता है। इसी तरह बाज़ार का रिस्क संस्थाओं से लेकर रिटेल निवेशकों व ट्रेडरों तक समान रहता है। फर्क बस इतना है कि दोनों इस रिस्क को अलग तरीके से देखते और उससे निपटते हैं। रिटेल ट्रेडर हमेशा टिप्स पकड़ने के लिए हर किसी से पूछता है कि बाज़ार कहां जाएगा, जबकि संस्थाएं बाज़ार का मूड जानने के लिए। अब सोम का व्योम…औरऔर भी