हमारी सबसे बड़ी गलती यह है कि दूसरों की छोड़िए, हम अपनी गलतियों तक से नहीं सीखते। हां, पछताने की भयंकर आदत हमने ज़रूर डाल रखी है। काश! मन में आई बात पर ट्रेड करते तो इस स्टॉक के 10% उछलने का फायदा मिल गया होता। काश! स्टॉप-लॉस पकड़कर चलता तो दो लाख रुपए डूबने से बच जाते। बंधुवर, असल दिक्कत यह है कि आपको रिस्क लेने और संभालने का सलीका नहीं आता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

उगते सूरज को सभी सलाम करते हैं और गिरे हुए इंसान को हर कोई लात मारता है। यह समाज की आम मानसिकता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में यही बात यूं कही जाती है कि हमेशा ट्रेन्ड की दिशा में ही ट्रेड करना चाहिए। लेकिन बाज़ार में असली कमाई वो करते हैं जो ट्रेड वहां पकड़ते हैं, जहां से ट्रेन्ड बदलता है। ट्रेन्ड बदलने का काम संस्थाएं या पारखी निवेशक करते हैं। अब आजमाएं बुधवार की बुदधि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में एक का नुकसान दूसरे का फायदा होता है। इसलिए यहां अक्सर लोग जो कहते हैं, वैसा नहीं, बल्कि उसका उल्टा करते हैं। एक ही ब्रोकरेज या रिसर्च फर्म वही स्टॉक रिटेल निवेशकों को बेचने को कहती है, जबकि संस्थागत निवेशकों को खरीदने को। जाहिर है, उस्ताद लोग असल में क्या कर रहे है, इसकी भनक नहीं लग सकती। इसलिए कभी कही या सुनी बातों पर यकीन न करें। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

कंपनियों के शेयरों में किया गया निवेश उसकी लाभप्रदता के साथ बढ़ता है। दूसरी तरफ शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में कमाई तब होती है, जब दूसरा गंवाता है। इसमें लालच और डर का खेल चलता है। वही ट्रेडर कमाता है जो दूसरों की लालच या डर का फायदा उठाता है। अगर हम खुद ही लालच/डर की फांस में फंस गए तो तय समझें कि हमारे खाते का धन दूसरा निगल जाएगा। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हर कंपनी कोई न कोई धंधा करती है। कुछ धंधे ऐसे होते हैं जो काल के गाल में समा जाते हैं। जैसे, कैसेट और वीसीआर का धंधा एकदम मिट गया। लेकिन दवा और साबुन, टूथपेस्ट जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों का धंधा ऐसा है जिसमें कभी मंदा नहीं आ सकता। हिदुस्तान यूनिलीवर नहीं तो पतंजलि आ जाएगी। धंधे और भी हैं जिनकी मांग कभी खत्म नहीं होती। तथास्तु में आज ऐसे ही सदाबहार धंधे में लगी एक कंपनी…औरऔर भी