बाज़ार कहीं भी जाए, हमारी बला से!
अक्सर लोगबाग पूछते हैं कि शेयर बाज़ार यहां से आगे कहां जाएगा? यह उन लोगों को सोच है जो या तो एकदम नौसिखिया हैं या ताज़िंदगी छिछली खिलाते रह गए। प्रोफेशनल ट्रेडर कभी नहीं सोचता/पूछता कि बाज़ार आगे कहां जाएगा। इस सवाल पर उसका जवाब होता है – बाज़ार कहीं भी जाए, मेरी बला से! वो देखता है कि बाज़ार की चाल दरअसल क्या है जिसके हिसाब से वो ट्रेड करता है। अब पकड़िए मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
ट्रेडिंग है सट्टेबाज़ी से आगे की चीज़
भविष्य की बात कौन नहीं जानता चाहता! आम जीवन में लोग इस कुतूहल को शांत कर थोड़ा आश्वस्त हो जाते हैं, जबकि शेयर बाज़ार में लोग इससे नोट बनाना चाहते हैं। लेकिन पक्की बात यह है कि भविष्य के बारे में भगवान भी कुछ पक्का नहीं कह सकता। उसको लेकर महज कयास लगाए जा सकते हैं। शेयर बाज़ार में इसे ही सट्टेबाज़ी या सटोरियापन कहते हैं। लेकिन ट्रेडिंग इससे आगे की चीज़ है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
फटा जो स्मॉल कैप का बुलबुला!
बाज़ार फिलहाल ढलान पर है। ठीक पिछले एक साल में बीएसई सेंसेक्स 13.04% गिरा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 4.66% ही गिरा है। सेंसेक्स 18.15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 56.25 के पी/ई पर। ऐसे में बाज़ार में आगे छोटी कंपनियों के शेयरों का बुलबुला फट सकता है। इसलिए सावधान रहने की ज़रूरत है। पर, अच्छी छोटी कंपनियों के आने का क्रम बना रहता है। ऐसी ही एक अच्छी कंपनी…औरऔर भी
स्टॉक जाता किस हाथ से किस हाथ!
स्टॉक्स को चुनने व समझने में टेक्निकल चार्ट काम आते हैं। लेकिन चार्ट अपने-आप में पर्याप्त नहीं क्योंकि वे पुराने भावों से बनते हैं और, हम समय में पीछे जाकर ट्रेड नहीं कर सकते। चार्ट की उपयोगिता यह है कि हम उससे अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कोई स्टॉक कमज़ोर हाथों (डे-ट्रेडरों व सटोरियों के हाथों) से मजबूत हाथों (इनसाइडरों, प्रॉपराइटरी ट्रेडरों व संस्थाओं) में जा रहा है या स्थिति इससे उलट है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी






