वित्तीय बाज़ार में देश-विदेशी संस्थाओं के अलावा एनआरआई, एचएनआई और ब्रोकर हाउस भी ट्रेड करते हैं। इनकी खरीद-बिक्री से ही बाज़ार की दशा-दिशा तय होती है। लेकिन वे क्या कर रहे हैं, यह हम पहले से पता लगाने के चक्कर में पड़े तो पक्का धोखा खाएंगे। वे जो कुछ करते हैं, वह रोज़ाना भावों के चार्ट में खुलकर सामने आ जाता है। हमारा काम इन भावों से भावी दिशा को भांपना भर है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

तमाम निवेश सलाहकार और म्यूचुअल फंड के लोग कहते हैं कि हमें इक्विटी या शेयरों में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए। लेकिन यह नहीं बताते कि लॉन्ग टर्म मतलब कितना? साल-दो साल या पांच-दस साल! हमारा मानना है कि हर कंपनी के बढ़ने का एक चक्र होता है। उसी चक्र के हिसाब से हमें निवेश की मीयाद तय करनी चाहिए। मसलन, आज तथास्तु में बताई गई कंपनी का उठाव चक्र दो-तीन साल का ही है…औरऔर भी

सुबह-सुबह रिजर्व बैंक ने अचानक जब ब्याज दर 0.25% घटाकर 7.5% कर दी तो बाज़ार उछल पड़ा। सेंसेक्स 30,000 और निफ्टी 9100 के पार चला गया। लेकिन तभी मुनाफावसूली का ऐसा सिलसिला चला कि सेंसेक्स 0.72% और निफ्टी 0.82% गिरकर बंद हुआ। इससे एक ही बात साफ होती है कि खबरों और भावों में रिश्ता तो है, मगर सीधा नहीं। भाव खरीद और बिक्री के संतुलन से ही तय होते हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बाज़ार बंद होने के बाद डेढ़-दो घंटे और सुबह बाज़ार खुलने से पहले डेढ़-दो घंटे रिसर्च करना ज़रूरी है। हम ऐसी रिसर्च में खुद भी लगभग इतना-ही समय लगातार आपका काम थोड़ा आसान कर देते हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं कि आप कोई मेहनत न करें, बस यह कॉलम पढ़कर ट्रेडिंग से कमाई कर लें। ट्रेडिंग का अपना सिस्टम व अनुशासन आपको ही बनाना पड़ेगा। अब लगाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी