दिल्ली के चुनाव नतीजों ने जैसा चौंकाया है, उसे ‘ब्लैक स्वान’ पल कहा जाता है। इसे लेबनान के ट्रेडर और लेखक नासिब निकोलस ताबेल ने इसी नाम की किताब में साफ किया है। प्रायः ऐसा कुछ हो जाता है जिसकी हमने दूर-दूर तक कल्पना नहीं की होती। ट्रेडिंग करते वक्त इस अनिश्चितता को हमेशा याद रखना चाहिए। इसी की मार से बचने के लिए पोजिशन साइज़िंग जैसे उपाय किए जाते हैं। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार आज की नहीं, भविष्य की सोचकर चलते हैं। इसलिए बड़े सेंटीमेंटल होते हैं तो उनमें रिस्क भी ज्यादा होता है। इस रिस्क को संभालने का ही एक तरीका है पोजिशन साइज़िंग। रिटेल ट्रेडर भाव और भावना में आकर किसी स्टॉक में ज्यादा तो किसी में कम पूंजी लगाते हैं। वहीं, प्रोफेशनल ट्रेड अक्सर समभाव से सभी सौदों में समान पूंजी लगाते हैं। भावना पर लगाम के लिए यह ज़रूरी है। पकड़ें अब मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग में बड़ा तगड़ा नियम-धर्म चलता है। इसी में से एक है पोजिशन साइज़िंग। इसका कमाल यह कि उन्हीं स्टॉक्स और उतनी ही बढ़त या घटत पर कोई घाटा उठा सकता है, जबकि किसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि वह फायदा कमा लेता है। निवेश में जो महत्व संतुलित पोर्टफोलियो का है, वही महत्व ट्रेडिंग में पोजिशन साइज़िंग का है। इस हफ्ते हम आपको बराबर इसकी जानकारी देंगे। चलिए अब देखें सोम का व्योम…औरऔर भी

हम चाहकर भी सारे काम अकेले नहीं कर सकते। कुछ काम दूसरों को सौंपना ही पड़ता है। आपस की इसी निर्भरता से बनता है समाज और चलते हैं व्यापार और उद्योग-धंधे। काम की चीज़ सेवा भी हो सकती है और कोई उत्पाद भी। उत्पाद आम खपत का भी हो सकता है और औद्योगिक खपत का भी। उत्पाद ऐसा हो जिसके बिना काम नहीं चल सकता तो उसका धंधा फलता-फूलता है। तथास्तु में ऐसी ही संभावनामय छोटी कंपनी…औरऔर भी