सरकार ने चाहा। मगर, बहाना है कि ब्रोकरों के संगठन, एसोसिएशन ऑफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंजेज़ मेम्बर्स ऑफ इंडिया ने मांग की थी कि बजट के दिन शनिवार को बाज़ार खोला जाए ताकि उसी दिन मूल्यों की खोज़ सही हो जाए। असली बात यह है कि सरकार बजट पर फौरन बाज़ार की तालियां चाहती है। सेबी ने सरकार का इशारा समझते हुए बजट के दिन बाज़ार खोलने का फरमान जारी कर दिया। अब करते हैं हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में भरोसे का भयंकर अकाल है। तमाम ब्रोकरेज़ हाउस व एनालिस्ट घनेरों सलाह देते हैं। लेकिन, वे जो कहते हैं, खुद उसका उल्टा करते हैं। उनका मकसद किसी तरह निवेशकों का शिकार करना होता है। निवेशकों की हालत यह है कि दूध का जला, छाछ भी फूंककर पीता है। ऐसे में निष्पक्ष व ईमानदार सलाह का पता लगते ही लोग उसके दीवाने हो सकते हैं। मगर, उन्हें पता तो लगे! तथास्तु में नई संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार आज की वस्तुस्थिति पर नहीं, कल की संभावित स्थिति पर चलता है। इसलिए यहां डर और लालच, दो ही भावनाएं काम करती हैं। लंबे निवेश का फंडा अलग है। पर, छोटे समय में ट्रेडिंग से वही कमाता है जो अपनी डर या लालच की भावना पर काबू रखते हुए दूसरों की डर या लालच की भावना का इस्तेमाल करता है। कहना आसान, करना बेहद मुश्किल। मगर, सफल ट्रेडिंग का यही राज़। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अल्गोरिदम या हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेड (एचएफटी) का नाम सुनकर हम खुद को बड़ा पस्त महसूस करते हैं। ऐसे ट्रेड अमूमन इंट्रा-डे होते हैं और इसमें चंद पैसों की चाल पर लाखों कमाए जाते हैं। सारा काम कंप्यूटर में पहले से दर्ज सॉफ्टवेयर करता है। पलक समझते ही सौदा पूरा। स्पीड और पूंजी में हम उनकी बराबरी नहीं कर सकते। लेकिन अपने नियमबद्ध या अल्गोरिदम स्विंग ट्रेड में हम उन्हें मात कर सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

प्रकृति ही नहीं, बाज़ार में भी कमज़ोर चीज़ नहीं चलती। बिना तैयारी के यहां जो कोई आता है, जानकार लोगों का शिकार बन जाता है। यहां कोई इंट्यूशन या घमंड नहीं चलता क्योंकि जब चीजें पल-पल बदल रही हों तब घमंड आपको एक जगह चिपका देता है। और, ज़िंदगी की ट्रेड-मिल पर आपका पैर कहीं चिपका तो समझो कि आप गए। नई गति को पकड़ने का माद्दा हो, तभी ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी