कल बाज़ार के एक पुराने जानकार से मिला। कहने लगे कि सच बहुत कड़वा होता है, पर सच यही है कि बीते दो दशक में अच्छी पारदर्शिता आने के बावजूद अपना बाज़ार अभी सचमुच पूरा पारदर्शी नहीं हुआ है। एक्सचेंज या सेबी वही आंकड़े बताते हैं जिनमें गहरा गोता लगाकर भी सच की मणि नहीं मिलती। मैं भी सोचने लगा कि अक्सर ठीक ढाई बजे बाज़ार अचानक पलटी क्यों मारता है? सोचिए, समझिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस का वही महत्व है जो गाड़ी में ब्रेक का। दरअसल, स्टॉप-लॉस का तत्व हर ट्रेडर के डीएनए का हिस्सा होना चाहिए। लेकिन बहुत से लोग अपने को सही ठहराने के लिए स्टॉप-लॉस को उल्टी दिशा में गिराते-उठाते रहते हैं। लॉन्ग सौदे में शेयर गिर गया तो स्टॉप-लॉस को और नीचे ले जाते हैं। शॉर्ट किया तो स्टॉक के बढ़ने पर स्टॉप-लॉस उठा दिया। इस तरह अनुशासन तोड़ना घातक होता है। अब मंगलवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार नशे में टुन्न किसी मनोरोगी जैसा है। यह कहना है दुनिया के सबसे कामयाब निवेशक वॉरेन बफेट का। हम उनकी बात को कतई चुनौती नहीं दे सकते क्योंकि ऐसी सोच की बदौलत ही उन्होंने करीब 7300 करोड़ डॉलर की दौलत बनाई है। लेकिन यह भी सच है कि बाज़ार उल्लास और अवसाद की अतियों के बीच झूलता है। समझदार ट्रेडर ‘नशे में टुन्न मनोरोगी’ बाज़ार के इसी बर्ताव से कमाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग और निवेश की दुनिया एकदम भिन्न है। एक में भावों का ट्रेन्ड पकड़ते हैं। ट्रेन्ड गलत निकले तो मार से बचने के लिए स्टॉप-लॉस लगाकर चलना ज़रूरी है। वहीं, निवेश शेयर के अंतर्निहित मूल्य के आधार पर किया जाता है। बाजार भाव उससे जितना कम होता है, निवेश उतना ही फलदायी होता। कंपनी के मूलभूत कारक मजबूत हैं और शेयर गिर गया तो उसे और ज्यादा खरीदा जा सकता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बड़ी उलटबांसियां चलती हैं बाज़ार में। जैसे अगर किसी शेयर में खरीदनेवाले बिड, बेचनेवाले ऑफर से कई गुना ज्यादा हों, खबर भी जबरदस्त हो तो सामान्यतः उसका भाव चढ़ जाना चाहिए। फिर भी वह ठहरा हुआ है तो हम खरीदने के लिए लपकते हैं। लेकिन सावधान! इस स्थिति में संस्थाएं बेचने को तैयार बैठी रहती हैं और अगले कुछ दिनों में उस शेयर में भारी गिरावट आ सकती है। अब नज़र डालते हैं शुक्रवार की मनोदशा पर…औरऔर भी