सावधान! सामने बैठा है घाघ खिलाड़ी
ट्रेडिंग में वही रिस्क उठाने चाहिए जिसमें अपने फायदे की गुंजाइश ज्यादा और नुकसान की न्यूनतम हो। अंधे रिस्क का कोई मतलब नहीं क्योंकि याद रखें कि सामनेवाला घाघ खिलाड़ी घात लगाए बैठा है। इसलिए बाज़ार में उतरें तो पूरी तैयारी और गणना के साथ कि फायदे की प्रायिकता और दांव उल्टा पड़ने की आशंका कितनी है। सतर्क रहें और दांव उल्टा पड़ते ही कम से कम नुकसान में बाहर निकल लें। अब देखें सोम का व्योम…औरऔर भी
स्मॉल-कैप है उछलता-गिरता तेज़ी से
बिन-मांगे बहुतेरी टिप्स का एसएमएस आता रहता है। लेकिन अच्छी कंपनियों की खबर लगते ही उस्ताद लोग उन्हें बताते किसी को नहीं, खुद खरीदते चले जाते हैं। आज हम तथास्तु में ऐसी ही एक संभावनामय कंपनी के बारे में बताने जा रहे है जिसका शेयर पिछले पांच दिन में 35% से ज्यादा बढ़ गया। जाहिरा तौर पर निवेश से पहले उसके ठंडा होने का इंतज़ार करना पड़ेगा। और, ऐसा होकर रहेगा क्योंकि स्मॉल-कैप की यही फितरत है।…औरऔर भी
खबर ही प्राण है, बाकी तो सब काया है
भाव उम्मीदों से बनते हैं और उम्मीद बनती है माकूल खबर से। इसलिए ब्याज दर में कमी की खबर लगते ही निफ्टी सारी सुस्ती छोड़कर खुला ही करीब 150 अंक या 1.78% ऊपर। लगातार बढ़ता-बढ़ता 2.50 बजे के आसपास 3% चढ़ गया और आखिर में 2.62% की बढ़त के साथ 8500 से ज़रा-सा नीचे बंद हुआ। यह 9 मई 2014 के बाद पिछले आठ महीनों की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त है। करते हैं अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
भावों की भाषा है, अबूझ भगवान नहीं
भावों की भाषा सीखना-समझना फैंच या स्पैनिश सीखने से कम नहीं। लेकिन ट्रेडिंग में सफल होना है तो भावों की भाषा में पारंगत होना बहुत ज़रूरी है। भाव को भगवान मानने से काम नहीं चलेगा। उसकी तह में पैठने के लिए तमाम किताबें पढ़नी पड़ेंगी, टेक्निकल एनालिसिस तक की थाह लेनी पड़ेगी। कारण, हमारे पास देखने को भाव और आजमाने को अपनी बुद्धि व अभ्यास के अलावा और कुछ नहीं है। अब परखते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी







