निवेश कोई सबसे ज्यादा रिटर्न पाने की दौड़ नहीं है। यह तो वह तरीका है जिसमें आप अपने धन को सुरक्षित रखते हुए अधिकतम रिटर्न कमा सकते हैं। जिस कंपनी को आप जानते हैं, उसके उत्पादों व सेवाओं से परिचित हैं, उसमें निवेश ज्यादा सुरक्षित रहेगा, बनिस्बत उस कंपनी के, जिसको न आप जानते हैं और न जिसका धंधा आपको समझ में आता है। जैसे, डाबर या कॉलगेट पामोलिव? तथास्तु में आज एक ऐसी ही परिचित कंपनी…औरऔर भी

अपने फैसलों के मोह में फंस जाना इंसान की सहज प्रवृत्ति है। एक बार मन ही मन कुछ तय कर लिया तो बाहर उसकी पुष्टि करनेवाली चीजें ही देखता है। खिलाफ जानेवाले तथ्यों को दरकिनार कर देता है। यही वजह है कि बहुतेरे ट्रेडर चार्ट पर वास्तविक स्थिति नहीं, बल्कि अपनी सोच की पुष्टि करनेवाली आकृतियां ही देख पाते हैं। तथ्यों की बेरोकटोक स्वीकृति और लचीलापन ट्रेडिंग में सफलता के लिए ज़रूरी है। अब शुक्र का चक्र…औरऔर भी

हवा में तीर जुआरी छोड़ते हैं। निवेशक या ट्रेडर हमेशा हिसाब लगाकर चलते हैं कि कोई शेयर कहां तक जा सकता है। आकलन सही हुआ तो कमाते हैं, नहीं तो गंवाते हैं। धुरंधर विश्लेषकों का भी आकलन सही होगा या गलत, यह प्रायिकता पर निर्भर करता है। लेकिन इतना तय है कि बिजनेस अखबारों या चैनलों पर आने वाले भावी आकलन खोखले होते हैं क्योंकि वे रुख को ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार की स्थिति 10-15 साल पहले से बहुत बदल चुकी है। भागीदारों की संख्या व स्तर के अलावा सबसे बड़ा बदलाव आया है पारदर्शिता का। बाज़ार में क्या-क्या हुआ, सारा कुछ शाम को मुफ्त में हमारे सामने होता है। यही नहीं, बीएसई व एनएसई दोनों ही टेक्निकल चार्ट की सुविधा देते हैं जिसमें हम बीसियों इंडीकेटर डालकर स्टडी कर सकते हैं। बस, हमें इन विशद आंकड़ों व संकेतकों की समझ होनी चाहिए। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी