पाप का घड़ा कब भरता है, पता नहीं। लेकिन बिजनेस चैनलों के एनालिस्टों और एंकरों के पाप बढ़ते जा रहे हैं। जिस निवेशक को जागरूक करने की बात करते हैं, डीलिंग-सेटिंग करके वे उसका ही शिकार करवाते हैं। सीएनबीसी के एक ऐसे ही स्टार एंकर अकूत कमाई के बाद फिलहाल आराम फरमा रहे हैं। अफसोस कि ‘आवाज़’ में भी ऐसी हाथ-सफाई चल रही है। इन चैनलों का शिकार होने से बचें। आज तथास्तु में एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

इस बार नहीं, अगली बार सही। अगर आप बाज़ार में इस सोच के साथ ट्रेड कर रहे हैं तो दरअसल आप ट्रेडिंग नहीं, सट्टेबाज़ी कर रहे हैं। याद रखें, जीवन में बाधाओं का मुकाबला करते हुए आगे बढ़ने के लिए आशावाद निहायत जरूरी है। लेकिन ट्रेडिंग में अतार्किक आशावाद अफीम के नशे की तरफ आपको खोखला बना डालता है। नियम बनाइए, उन पर चलिए और नफे या नुकसान की जिम्मेदारी खुद लीजिए। अब देखें शुक्र का हाल…औरऔर भी

लगातार तीन ट्रेड गलत। हरेक में 2-2% का स्टॉप लॉस तो कुल 6% का नुकसान। नियम कहता है कि इतना नुकसान होते ही महीने भर के लिए ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए। कुछ भी करें। पढ़ें-लिखें। मौजमस्ती करें। लेकिन ट्रेडिंग न करें। इसकी बड़ी मनोवैज्ञानिक वजह है। दरअसल, सचमुच का घाटा लगने पर हम अंदर से घबरा जाते हैं और घबराहट में गलत फैसले ले सकते हैं। ट्रेडिंग पूंजी को आंच न आने दें। अब गुरुवार का दशा-दिशा…औरऔर भी

पहाड़ से उतरिए तो शॉर्टकट से खटाखट 15 मिनट में नीचे पहुंच जाएंगे। लेकिन उसी या किसी अन्य रास्ते से चढ़िए तो घंटे-डेढ़ घंटे लगेंगे। शेयरों का भी यही हाल है। 100 से 98 तक आया तो गिरा 2%, लेकिन वापस 100 तक पहुंचने के लिए 2.04% बढ़ना होगा। 5% गिरा तो वापस पहुंचने के लिए 5.26% बढ़ना होगा। 50% गिरा तो खोया धन पाने के लिए 100% बढ़ना होगा। इसलिए घाटा संभालें। अब आगाज़ बुधवार का…औरऔर भी

अंग्रेज़ी में कहावत है कि एक ही टोकरी में सारे अंडे रखोगे तो टूट जाएंगे। इसीलिए निवेश में पोर्टफोलियो का नियम चलता है। न्यूनतम 40 कंपनियों का पोर्टफोलियो हो तो उनके अलग-अलग रिस्क आपस में कट जाते हैं, बचता है केवल बाज़ार का समग्र रिस्क। इसी तरह ट्रेडिंग में पोर्टफोलियो का नियम कहता है कि 100 रुपए हों तो 5-5 रुपए 20 स्टॉक्स में लगाओ। कुछ विशेषज्ञ 2-2 लगाने की सलाह देते हैं। अब मंगल का मंगलम…औरऔर भी