चिड़िया-सा चुगना या शेर-सा शिकार
चिड़िया सूरज निकलने से पहले जग जाती है और दिन भर दाना या कीड़-पतंगे चुगती रहती है। तब जाकर कहीं उसका नन्हा-सा पेट भरता है। वहीं शेर देर से उठता और ज्यादातर सोता रहता है। बस, एकाध बार तगड़ा शिकार झपटकर मस्त रहता है। छोटे-मोटे ट्रेडरों और प्रोफेशनल ट्रेडरों में यही फर्क है। प्रोफेशनल ट्रेडर शेर की तरह पक्की रिसर्च करते हैं और दोपहर के आसपास लंबा शिकार कर मस्त हो जाते हैं। अब शुक्र का वार…औरऔर भी
निवेश में लॉन्ग, ट्रेडिंग में शॉर्ट क्यों!
हर किसी के जेहन में एक ही सवाल है; बाज़ार यहां से कहां जाएगा? इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है जब तक इसे निश्चित टाइमफ्रेम में नहीं बांधा जाता। अभी वैश्विक अर्थव्यवस्था का जो हाल है और जिस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर हो रहा है, उसमें छोटी अवधि में बाज़ार का गिरना तय है। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावना को देखते हुए लंबी अवधि में बाज़ार का बढ़ना तय है। अब देखें गुरु का दशा-दिशा…औरऔर भी
बाज़ार है हमेशा सही, गलत होते हम
ट्रेडिंग सरल तो है, पर आसान नहीं। सरल इसलिए कि हमें बाज़ार के काम करने का बुनियादी तरीका समझना और कारगर, वस्तुगत व तर्कसंगत तरीके से ट्रेड करना है। पर, यह सब समझना और ‘कारगर, वस्तुगत व तर्कसंगत’ तरीका अपनाना बेहद कठिन है। खास तौर पर, हम बाज़ार के बारे में वस्तुगत नहीं हो पाते, अपनी ही धारणाओं के गुलाम या आत्मगत बने रहते हैं। लगातार घाटे पर घाटे का यही सबक है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी
बाहर की धड़कनों पर चल रही नब्ज़
हाल-फिलहाल वित्तीय बाज़ार एकदम विश्वमय हो गए हैं। आज और कल अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की ओपन मार्केट कमिटी की बैठक होनी है। इसमें तय किया जाएगा कि ब्याज की दर कब बढ़ाई जाए। पिछले बैठक में तय हुआ था कि साल 2015 के मध्य में कभी ऐसा किया जा सकता है। लेकिन नवंबर में रोज़गार के बेहतर आंकड़ों के बाद ऐसा जल्दी हो गया तो अमेरिका वापस भागने लगेगा निवेश। अब देखें मंगल की नब्ज़…औरऔर भी
ट्रेडिंग में पक्का नहीं, प्रायिकता सही
वित्तीय प्रपत्रों की ट्रेडिंग में कोई अगर दावा करे कि भाव पक्का कहां जाएंगे तो वह या तो खुद बहुत बड़ा मूर्ख है या आपको जान-बूझकर मूर्ख बना रहा है। कारण, भावी भाव को प्रभावित करनेवाले सारे कारकों को देख पाना इंसान ही नहीं, भगवान तक के लिए असंभव है। हम गिने-चुने कारकों को ध्यान में रखकर ही गणना करते हैं। एक भी नया कारक सारा समीकरण उलट-पुलट सकता है। अब करते हैं नए सप्ताह का आगाज़…औरऔर भी





